06 June, 2026 (Saturday)

बड़बोले इमरान खान ने कहा, दोनों देशों में शांति स्थापना से भारत को मिलेगी मध्य एशिया तक सीधी पहुंच

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भारत के साथ शांति स्थापना की बात तो करते हैं, लेकिन अपने बड़बोले से बाज नहीं आते हैं। उन्होंने कहा है कि अगर भारत और इस्लामाबाद के बीच शांति स्थापित होती है तो इससे नई दिल्ली को संसाधन संपन्न मध्य एशिया तक पहुंचने में मदद मिलेगी। इमरान ने दावा किया कि वर्ष 2018 में सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने भारत के साथ संबंधों को बेहतर करने के लिए काफी कदम उठाए, लेकिन नई दिल्ली की तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

पाकिस्तान के पीएम ने कहा, संबंध सामान्य बनाने के लिए नई दिल्ली को उठाना होगा पहला कदम

क्रिकेटर से राजनेता बने पीएम ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य बनाने के लिए भारत को पहला कदम उठाना होगा। जब तक वह ऐसा नहीं करते हैं, तब तक बहुत कुछ नहीं किया जा सकता है। बता दें कि भारत ने पिछले महीने ही कहा था कि वह पाकिस्तान के साथ संबंध सामान्य तो बनाना चाहता है, लेकिन इसके लिए पहले आतंक और शत्रुतापूर्ण वातावरण को खत्म करना होगा। भारत ने यह भी कहा था कि बातचीत और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते हैं। संबंधों को सामान्य बनाने से पहले इस्लामाबाद को भारत पर हमला करने वाले आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।

कश्मीर के अनसुलझे मुद्दे सबसे बड़ी बाधा

दो दिवसीय इस्लामाबाद सिक्योरिटी डायलॉग के शुभारंभ पर उद्घाटन भाषण देते हुए इमरान ने कहा कि कश्मीर के अनसुलझे मुद्दे दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य करने में सबसे बड़ी बाधा हैं। उन्होंने कहा कि अगर भारत कश्मीरियों को संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के तहत उनको अधिकार देता है तो दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा।

संबंध सामान्‍य होने से नई दिल्‍ली को लाभ होगा

खान ने कहा कि भारत से मध्य एशिया पहुंचने के लिए पाकिस्तान का रास्ता बिल्कुल सीधा है और दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य होने से नई दिल्ली को इसका आर्थिक लाभ होगा। मध्य एशिया के देशों में कजाखिस्तान, किरगिस्तान, उजबेकिस्तान, तजाकिस्तान और उजबेकिस्तान आते हैं। बता दें कि लगभग डेढ़ वर्ष से अधिक समय पहले भारत ने ना केवल जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया था बल्कि उसे दो केंद्रशासित प्रदेश विभाजित कर दिया था। मोदी सरकार के इस फैसले को लेकर पाकिस्तान ने खूब उछलकूद की, लेकिन उसे विश्व समुदाय का समर्थन नहीं मिला।

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