डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम शहबाज को किया जलील, खड़ा करवाकर बोले- पीएम मोदी महान
वॉशिंगटन में हुए बोर्ड ऑफ पीस (Board of Peace) के उद्घाटन सत्र में एक दिलचस्प वाकया सामने आया, जो अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच शांति का श्रेय खुद को दिया। ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भाषण के बीच खड़ा होने के लिए कहा और फिर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की।
शहबाज शरीफ को किया जलील
संबोधन के दौरान ट्रंप ने कहा, “भारत-पाकिस्तान संघर्ष बड़ा मसला था। मैंने प्रधानमंत्री मोदी से बात की है और वह इस कार्यक्रम को देख रहे होंगे।” इसके बाद उन्होंने शहबाज शरीफ को खड़ा होने के लिए कहा और मंच से कहा, “भारत और पाकिस्तान, आप दोनों का धन्यवाद। मोदी एक महान व्यक्ति हैं और मेरे अच्छे दोस्त हैं।”
#WATCH | At the Board of Peace Event, US President Donald Trump says, "Pakistan and India, that was a big one. Pakistan and India, thank you very much. I spoke to Prime Minister Modi. He's excited. He's watching us right now."
(Source: White House) https://t.co/EiZ39UDrwA pic.twitter.com/AnAug4zCLG
— ANI (@ANI) February 19, 2026
ट्रंप ने फिर दोहराई बात
ट्रंप ने एक बार फिर अपने पुराने दावे को दोहराया कि उन्होंने पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध को एक फोन कॉल के जरिए रोका था। ट्रंप का कहना था, “जब मुझे यह खबर मिली कि दोनों देश लड़ रहे हैं और विमान गिराए जा रहे हैं, तो मैंने फोन उठाया और कहा कि अगर युद्ध नहीं रुका, तो मैं दोनों देशों पर 200 प्रतिशत का व्यापारिक टैरिफ लगा दूंगा।”
शांति प्रक्रिया में तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं
हालांकि, भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि भारत-पाकिस्तान के बीच किसी भी संघर्षविराम या शांति प्रक्रिया में तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं होती। भारत लगातार कहता रहा है कि इन मुद्दों को केवल दोनों देशों के बीच ही सुलझाया जा सकता है।
ट्रंप की भारत को प्राथमिकता
इस कार्यक्रम में ट्रंप के बयानों और शहबाज शरीफ को खड़ा करने के तरीके को लेकर कई विश्लेषकों ने पाकिस्तान के लिए असहज स्थिति बताया है। पाकिस्तान, जो हाल के समय में अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है, को ट्रंप के बयान में बार-बार मोदी और भारत को प्राथमिकता देते हुए देखा गया। इससे कूटनीतिक संतुलन पर सवाल उठ रहे हैं।
