23 July, 2026 (Thursday)

राष्ट्रपति ट्रंप से जुड़ी फाइल पर मचा बवाल, 30 लाख दस्तावेज कर दिए सार्वजनिक, वीडियो भी आए

वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिका के चर्चित यौन अपराधी और बदनाम फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मामले ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति और व्यापारिक जगत में भूचाल ला दिया है। अमेरिकी न्याय विभाग ने शुक्रवार को इस मामले से जुड़े 30 लाख से अधिक पन्नों के विशाल डेटाबेस को सार्वजनिक करने की घोषणा की है। इसे अब तक का सबसे बड़ा दस्तावेजी खुलासा माना जा रहा है, जिसकी आंच अमेरिका के साथ-साथ ब्रिटेन के रसूखदार गलियारों तक पहुंच गई है। हालांकि, इन दस्तावेजों में वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े संवेदनशील विवरणों को लेकर न्याय विभाग विवादों के घेरे में आ गया है। खबरों के मुताबिक, ट्रंप के खिलाफ यौन उत्पीड़न के अप्रमाणित आरोपों वाली एक बेहद संवेदनशील फाइल को अपलोड करने के कुछ ही घंटों बाद वेबसाइट से हटा दिया गया और बाद में उसे फिर से साझा किया गया, जिससे सोशल मीडिया पर कयासों का दौर शुरू हो गया।
अमेरिका के डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस खुलासे की भयावहता की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जारी किए गए डेटा में न केवल लिखित दस्तावेज हैं, बल्कि करीब 2,000 वीडियो और 1 लाख 80 हजार से ज्यादा तस्वीरें भी शामिल हैं। हालांकि, पीड़ितों की गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे कानूनी कारणों से दस्तावेजों के कई हिस्सों को ब्लैक आउट यानी संपादित किया गया है। न्याय विभाग के अनुसार, जांच के दौरान कुल 60 लाख से अधिक पन्नों को प्रासंगिक पाया गया था, जिनमें एफबीआई और न्याय विभाग के आंतरिक ईमेल, गवाहों के साक्षात्कार, जांच रिपोर्ट और एपस्टीन के निजी डिजिटल डिवाइस से जब्त किया गया डेटा शामिल है। फिलहाल लगभग 35 लाख पन्ने सार्वजनिक किए गए हैं, जबकि शेष सामग्री को चल रही जांच और मेडिकल निजता के आधार पर सुरक्षित रखा गया है।
इन फाइलों में सबसे ज्यादा चर्चा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम की हो रही है, जिसका जिक्र सैकड़ों बार आया है। विवाद का मुख्य केंद्र अगस्त 2025 में एफबीआई द्वारा तैयार की गई एक सूची है, जिसे कुछ समय के लिए सार्वजनिक डोमेन से हटाया गया था। इस फाइल में ट्रंप के खिलाफ तीन दशक पुराने गंभीर लेकिन अप्रमाणित आरोपों का विवरण दर्ज है। इनमें से एक आरोप यह है कि न्यू जर्सी में लगभग 35 साल पहले एक नाबालिग लड़की को यौन कृत्य के लिए मजबूर किया गया था। दस्तावेज स्वयं स्वीकार करते हैं कि ये दावे एक अज्ञात महिला मित्र की शिकायत पर आधारित हैं और इनका कोई स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है। व्हाइट हाउस और न्याय विभाग दोनों ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया है कि इन आरोपों का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं पाया गया है। न्याय विभाग के भीतर हुए ईमेल संवादों से पता चलता है कि ये शिकायतें एफबीआई के नेशनल थ्रेट ऑपरेशंस सेंटर (एनटीओसी) को मिली थीं। अगस्त 2025 में न्यूयॉर्क फील्ड ऑफिस से भेजे गए एक ईमेल में इन नामों की सूची का जिक्र था, जिसमें उन लोगों के नाम शामिल थे जिन्होंने ट्रंप पर आरोप लगाए थे। गौर करने वाली बात यह है कि इन दस्तावेजों में किसी भी टिप की पुष्टि या सत्यापन का कोई प्रमाण नहीं मिला है। बावजूद इसके, इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेजों के सार्वजनिक होने ने यह साफ कर दिया है कि एपस्टीन का काला साम्राज्य कितना विस्तृत था और इसमें शामिल सफेदपोश चेहरों की फेहरिस्त कितनी लंबी है। इस खुलासे ने एक बार फिर अमेरिकी न्याय प्रणाली और उच्च पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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