06 June, 2026 (Saturday)

मौत को मात… हार्ट अटैक के बाद बड़ा खुलासा, नागपुर में 70 साल की महिला का दाईं तरफ मिला दिल

नागपुर में एक 70 साल की महिला में दाईं ओर दिल पाया गया. 70 साल तक वह इस बात से अनजान रहीं, सीने में दर्द के कारण जांच में इसका पता चला. डॉक्टरों ने महिला की जान बचाकर चिकित्सा जगत में बड़ी मिसाल पेश की है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट
मौत को मात… हार्ट अटैक के बाद बड़ा खुलासा, नागपुर में 70 साल की महिला का दाईं तरफ मिला दिल
नागपुर की महिला में दाहिने साइड मिला दिल

महाराष्ट्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो सबको हैरान कर रहा है. नागपुर के साओनेर की एक 70 साल की महिला में दाईं तरफ दिल मिला है, जिसे देखकर डॉक्टर भी आश्चर्यचकित हैं. आमतौर पर ऐसा नहीं होता है. डॉक्टर के मुताबिक, यह एक दुर्लभ केस है और इसकी वजह एक बीमारी है, जिसका नाम ‘डेक्सट्रोकार्डिया’ है. यह एक जन्मजात रोग है. यह मामला हार्ट अटैक के चलते सामने आया.

क्या है पूरा मामला?
साओनेर की रहने वाली एक 70 वर्षीय महिला को सीने में दर्द और सांस की तकलीफ के कारण हिंगना रोड स्थित लता मंगेशकर अस्पताल में भर्ती कराया गया. उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जब डॉ. हितेंद्र भगवतकर ने उनकी जांच की, तो एक बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई. जांच के दौरान डॉक्टर को महिला का दिल शरीर के बाईं ओर के बजाय दाईं ओर मिला.

हेल्थ साइंस में इस दुर्लभ स्थिति को ‘डेक्सट्रोकार्डिया’ कहा जाता है. इस बीमारी में दिल जन्म से ही दाहिनी ओर होता है. इस मामले की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि महिला 70 साल तक इस बात से अनजान रहीं और इतनी उम्र में जाकर इस जन्मजात रोग का पता चला. दुनिया भर में ऐसे मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं, इसलिए इसे चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खोज माना जा रहा है.

डॉक्टरों ने पेश की बड़ी मिसाल
डॉक्टरों ने इस 70 साल की महिला की जान बचाकर चिकित्सा जगत में बड़ी मिसाल पेश की है. इस केस में दो बड़ी चुनौतियां थीं. पहली यह कि महिला का दिल शरीर के दाहिनी ओर था, जो कि एक दुर्लभ स्थिति है. दूसरी यह कि उनके दिल की मुख्य नस यानी लैट एड्रिया (LAD) 90 प्रतिशत तक ब्लॉक थी. दिल उल्टा होने के कारण सभी रक्त वाहिकाएं भी विपरीत दिशा में थीं, जिससे एंजियोप्लास्टी करना सामान्य से कहीं अधिक कठिन और जोखिम भरा था.

70 साल की महिला को मिली नई जिंदगी
डॉ. हितेंद्र भगवतकर और उनकी टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया और तकनीकी जटिलताओं के बावजूद सफलतापूर्वक स्टेंट लगाकर रक्त के बहाव को सामान्य कर दिया. डॉक्टर की सूझबूझ के चलते 70 वर्षीय महिला को नई जिंदगी मिल गई. सफल इलाज के बाद महिला की हालत अब ठीक है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. डॉ. भगवतकर ने बताया कि इको टेस्ट के दौरान इस दुर्लभ स्थिति का पता चला था, जिसे उनकी टीम ने अपनी कुशलता से सफलतापूर्वक हल किया. विधायक डॉ. आशीष देशमुख, डीन डॉ. सजल मित्रा और अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों ने इस सफलता के लिए टीम को बधाई दी है.

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