11 March, 2026 (Wednesday)

कांग्रेस विधायक का दावा: कहा- फलां-फलां तारीख को डीके लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ

बेंगलुरु,(ईएमएस)। कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान पहले दिल्ली में शांत कराई गई थी, लेकिन अब फिर से सियासी पारा चढ़ता दिख रहा है। हाल ही में एक कांग्रेस विधायक एच ए इकबाल हुसैन ने भविष्यवाणी की है, कि उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार 6 या 9 जनवरी को मुख्यमंत्री बन जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इसी तारीख के आसपास सिद्धारमैया दिवंगत नेता डी देवराज उर्स का रिकॉर्ड तोड़कर कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता बन जाएंगे।
विधायक हुसैन डीके शिवकुमार के मजबूत समर्थक माने जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि 99 प्रतिशत संभावना है कि शिवकुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे। तारीख के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने इसे एक यादृच्छिक संख्या बताया और कहा कि हर कोई यही चर्चा कर रहा है। यह 6 जनवरी या 9 जनवरी हो सकती है। रामनगर से विधायक हुसैन ने यह भी मांग की कि शिवकुमार को मौका देने के लिए सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद छोड़ देना चाहिए। उन्होंने खुले तौर पर शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की वकालत की और एक दिन पहले भी अपनी यह इच्छा सार्वजनिक रूप से जाहिर की थी।
इस बीच, केंद्रीय रेल राज्य मंत्री और भाजपा सांसद वी सोमन्ना ने गृह मंत्री जी परमेश्वर को मुख्यमंत्री पद के लिए समर्थन देने की बात कही। तुमकुरु में एक कार्यक्रम के दौरान सोमन्ना ने कहा कि सत्ता मिलना किस्मत की बात है। उन्होंने परमेश्वर की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी इच्छा है कि वे मुख्यमंत्री बनें और यह तुमकुरु के लोगों की भी भावना है। जब डीके शिवकुमार का नाम लिया गया, जो खुद एक मजबूत दावेदार हैं, तो सोमन्ना ने कहा कि यह अलग बात है और शिवकुमार का भविष्य उनकी किस्मत पर निर्भर करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आचरण किस्मत से भी बड़ा होता है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार 14 दिसंबर को दिल्ली में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से मिलने वाले हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान पर चर्चा होगी। यह मुलाकात नई दिल्ली में कांग्रेस की एक बड़ी रैली के बाद होगी। इस रैली का उद्देश्य सत्ता पक्ष पर आरोप लगाना था।
कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास लगभग 140 विधायक हैं, जो बहुमत देते हैं। नवंबर में सरकार के पांच साल के कार्यकाल का आधा हिस्सा पूरा होने के बाद से नेतृत्व बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं। खबरें हैं कि नई पीढ़ी को मौका देने के लिए मुख्यमंत्री पद को ढाई-ढाई साल के लिए बांटने का एक संभावित समझौता हुआ है। हालांकि, न तो पार्टी और न ही किसी नेता ने आधिकारिक तौर पर ऐसे किसी समझौते की पुष्टि की है। शिवकुमार ने कुछ समय पहले बिना विवरण दिए एक गुप्त समझौते का जिक्र किया था।
वर्तमान में 63 वर्षीय शिवकुमार ने 77 वर्षीय मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ कोई खुला कदम नहीं उठाया है। फिर भी, पार्टी के अंदर गुटबाजी और दबाव की स्थिति बनी हुई है। विधायक हुसैन जैसे समर्थक खुले तौर पर शिवकुमार की दावेदारी मजबूत कर रहे हैं, जबकि सिद्धारमैया अपने कार्यकाल को पूरा करने और रिकॉर्ड बनाने पर फोकस कर रहे हैं। यह स्थिति कर्नाटक कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि एकजुटता दिखाना जरूरी है, लेकिन अंदरूनी कलह पार्टी की छवि को प्रभावित कर सकती है। आने वाले दिनों में दिल्ली की बैठक और पार्टी हाईकमान के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं। क्या नेतृत्व बदलाव होगा या सिद्धारमैया अपना कार्यकाल पूरा करेंगे, यह जल्द ही स्पष्ट हो सकता है। राज्य की राजनीति में यह घमासान आगे और तेज होने की संभावना है।

 

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