11 March, 2026 (Wednesday)

युद्धविराम बातचीत फेल होने के बाद पाक रक्षा मंत्री दे रहे गीदड़ भभकी

तालिबान ने टीटीपी के खिलाफ कदम नहीं उठाए, तो सभी विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे
इस्लामाबाद,(ईएमएस)। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि इंस्ताबुल में तालिबान के साथ युद्धविराम को लेकर चल रही बातचीत नाकाम हो गई। उन्होंने कहा कि युद्धविराम तभी तक लागू रहेगा, जब तक अफगानिस्तान की जमीन से कोई हमला नहीं होता। इससे पहले ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर वार्ता नाकाम रहती है तो पाकिस्तान को तालिबान के साथ युद्ध में उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी है कि यदि अफगान तालिबान ने टीटीपी के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाए, तो इस्लामाबाद अपने सभी विकल्पों का इस्तेमाल करेगा। बता दें तुर्की के इंस्ताबुल में तालिबान और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम पर बैठक आयोजित की थी, जिसमें कतर और तुर्की मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान ने तुर्की के रवैये को लेकर तो पाकिस्तान ने कतर की भूमिका पर नाराजगी जताई। पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि कतर, तालिबान का पक्ष ले रहा था।
ख्वाजा आसिफ ने मीडिया से कहा कि अगर बातचीत विफल होती है, तो स्थिति और बिगड़ेगी। हमारे पास विकल्प मौजूद हैं। जिस तरह से हमें निशाना बनाया जा रहा है, उसे देखते हुए हम भी उसी तरह जवाब दे सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बैठक से कुछ घंटे पहले अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पार से हुई गोलीबारी में कम से कम पांच लोग मारे गए और छह घायल हुए थे। तालिबान और पाकिस्तान के बीच इससे पहले दो दौर की बैठकें हो चुकी हैं। पहली बातचीत 18-19 अक्टूबर को कतर की राजधानी दोहा में और दूसरे दौर की बैठक 25 अक्टूबर को इंस्ताबुल में हुई थी। अफगान मीडिया का कहना है कि तीसरे राउंड की बैठक में दोनों पक्षों के बीच गहरी अविश्वसनीयता देखी गई।
तुर्की और कतर के मध्यस्थ प्रयासों के बावजूद, इस्लामाबाद ने शिकायत की है कि काबुल ने अब तक लिखित गारंटी नहीं दी कि अफगान सरजमीं से पाकिस्तान पर टीटीपी के हमले नहीं होंगे। आसिफ ने कहा कि तालिबान सरकार सिर्फ मौखिक आश्वासन दे रही है और यह गंभीरता की कमी को दर्शाता है। उनके मुताबिक अफगान नेतृत्व के अंदर कई लोग ऐसे हैं जो चरमपंथी समूहों को संरक्षण दे रहे हैं इसलिए द्विपक्षीय संबंध सामान्य नहीं हो सकते।
तालिबान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी पक्ष तहरीक-ए-तालिबान के हमलों को रोकने को लेकर तो अड़ा हुआ था, लेकिन वो इस्लामिक स्टेर खुरासान के हमलों को लेकर बात करने के लिए तैयार नहीं। तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान आतंकियों को अफगान शरणार्थियों के साथ भेज रहा है, जिसका मकसद अफगानिस्तान में आतंकी हमले करने हैं। तालिबान ने अफगानिस्तान में होने वाले आतंकी हमलों के लिए पाकिस्तान पर आरोप लगाए हैं। वहीं, पाकिस्तान ने वार्ता शुरू होने से पहले अफगानिस्तान में हमले किए थे। हालांकि, इस्लामाबाद ने आरोपों का खंडन करते हुए जोर देकर कहा कि गोलीबारी अफगान पक्ष की ओर से शुरू की गई थी और पाकिस्तानी बलों ने संयम और जिम्मेदाराना तरीके से जवाब दिया। पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने एक्स पर कहा कि हम चमन में पाक-अफगान सीमा पर आज की घटना के संबंध में अफगान पक्ष द्वारा प्रसारित दावों को दृढ़ता से खारिज करते हैं।

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