आजम खान का खुला ऐलान- इस जीत को मेरी हार ना समझा जाए, बात बहुत खराब हो जाएगी! क्या अखिलेश को दे दिया मैसेज?
करीब 23 महीनों के बाद उत्तर प्रदेश की सीतापुर जेल से रिहा हुआ समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री आजम खान लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. जेल से निकलने के बाद आजम खान ने कई ऐसे बयान दिए हैं, जिनकी खूब चर्चा हो रही है. आजम खान से जुड़ा ऐसा ही एक दावा पिछले दिनों वरिष्ठ पत्रकार शाहिद सिद्दीकी ने कर दिया. अस्पताल में आजम खान से मुलाकात के बाद शाहिद सिद्दीकी ने आजम खान के हवाले से कह दिया कि उन्हें जेल में स्लो पॉइजन दिया गया था. हालांकि, बाद में आजम ने इस दावे से इनकार किया और कहा कि शहीद सिद्दीकी को कुछ गलतफहमी हुई होगी. अब आजम खान का इंटरव्यू चर्चा में है. इस इंटरव्यू में आजम खान ने मनचाहा टिकट नहीं देने, टिकट कटने-कटवाने और 2024 के लोकसभा चुनावों में सपा की जीत के संदर्भ में कुछ ऐसी बातें कह दी हैं, जिनको लेकर कयासबाजियां शुरू हो गई हैं.
इंटरव्यू के दौरान आजम खान से पूछा गया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के समय वह जेल में थे. तब सपा को उतनी सीटें मिलीं जितनी आप (आजम खान) और मुलायम सिंह यादव (सपा संस्थापक) मिलकर नहीं जीत पाए थे. क्या आज के 25-30 साल पहले आजम खान यूपी की पॉलिटिक्स में जितने रेलिवेंट थे, अपने आप को आज उतना ही रेलिवेंट पाते हैं? इन सवालों पर आजम खान के जवाब अब चर्चा में हैं.
आजम खान ने इस इंटरव्यू में कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में वह रामपुर का टिकट अपनी मर्जी से किसी उम्मीदवार को दिलवा नहीं पाए थे, तो वह मुरादाबाद में किसी का टिकट कैसे कटवा सकते थे. 2019 से 2024 तक मुरादाबाद के सांसद रहे एसटी हसन का चुनाव के वक्त आरोप था कि उनका टिकट आजम खान ने कटवाकर रूचि वीरा को दिलवाया था. बाद में रूचि वीरा की मुरादाबाद से जीत हुई थी. रामपुर में भी सपा ने मोहिबुल्ला नदवी को अपना उम्मीदवार बनाया था. ऐसा कहा जाता है कि मोहिबुल्ला नदवी को टिकट मिलने से आजम खान नाराज थे क्योंकि वो अपने किसी करीबी (चर्चा आसिम राजा को लेकर भी रही) नेता को टिकट दिलवाना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ था. चुनाव में सपा ने नदवी को टिकट दिया था और उनकी जीत हुई थी.
बातचीत के दौरान आजम खान ने एक बहुत बड़ा बयान दिया. आजम खान का यह बयान अखिलेश यादव से भी जोड़कर देखा जा रहा है. असल में इसी बातचीत में आगे उस चुनाव का जिक्र आया जब रामपुर से एक्ट्रेस जया प्रदा को टिकट दिया गया था. ये बात 2009 की है. तब आजम खान ने जया प्रदा को टिकट देने का विरोध किया था पर उनकी सुनवाई नहीं हुई थी. आजम खान ने इशारों में उस चुनाव का भी जिक्र करते हुए कहा कि तब भी उन्होंने विरोध नहीं किया था. आजम खान ने कहा कि मैंने तब भी मुखालफत नहीं की थी और अब भी (2024 लोकसभा चुनाव) मुखालफत नहीं की. आजम खान इसके बाद आगे बोल गए कि, ‘अब उस जीत को मेरी हार न समझा जाए. बात खराब हो जाएगी, बहुत खराब हो जाएगी बात.’
अब इस बात को लेकर कयासबाजी की जा रही है कि आजम खान ने 2024 के चुनाव में रामपुर समेत यूपी में अखिलेश यादव और सपा को मिली बड़ी जीत को उनकी हार न समझने की बात कही है, या वो जया प्रदा वाले चुनाव के संदर्भ में ये बात कह रहे थे.
इसी इंटरव्यू में जब आजम से पूछा गया कि 2024 के चुनाव में ‘आपके कहने पर ज्यादातर टिकट दिए गए’ इसपर उन्होंने कहा, “मैंने कहीं नहीं मांगा. सब गलत है. मुरादाबाद वालों (एसटी हसन) को यह शिकायत है कि मैंने उनका टिकट कटवाया. मैं रामपुर का दिलवा नहीं सका, उनका कैसे कटवा दूंगा. आपकी समझ में आती है यह बात? मैं रामपुर से किसी और को चाहता था, नाम भी था. नहीं मिला ठीक है, पार्टी का फैसला है.”
आजम खान ने कहा, “मैं बिलकुल साफ सुथरा आदमी हूं. दिल से सियासत करता हूं, दिमाग से नहीं. दिमाग से करता होता तो ये हश्र होता, ये अंजाम होता? मेरे तो दिल के रिश्ते हैं उस खानदान से (मुलायम सिंह परिवार). दिल नहीं दुखना चाहिए मेरा.”
जानकारी मिली है कि सपा चीफ अखिलेश यादव 8 अक्टूबर को रामपुर में आजम खान से मुलाकात करेंगे. अखिलेश का यह दौरा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है. क्योंकि यह बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की लखनऊ में होने वाली रैली से ठीक एक दिन पहले हो रहा है. इसे समाजवादी पार्टी की सोची-समझी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है.
बसपा संस्थापक कांशीराम के महापरिनिर्वाण दिवस पर होने वाली ये रैली इसलिए भी चर्चा में आई क्योंकि कयासबाजियां शुरू थीं कि आजम खान इस दिन कहीं बसपा न जॉइन कर लें. हालांकि जेल से निकलने के बाद आजम खान से जब इस बाबत कई दफा सवाल किए गए, तो हर बार उन्होंने ऐसी किसी सियासी संभावना को खारिज ही कर दिया. 8 अक्टूबर की मुलाकात के बाद बहुत कुछ पुख्ता हो जाएगा कि आजम खान की सियासी लाइन अब किस ओर जाएगी और सपा में उनका रोल क्या होगा.
