इन मंत्रों के साथ करें मां शैलपुत्री की पूजा, शादी में आ रही हर अड़चन होगी दूर
‘या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥’ आज हर घर और देवी मंदिरों से इस मंत्र का जाप गूंज रहा है। 22 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है, जिसका समापन राम नवमी के साथ 30 मार्च को होगा। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना की जाती है। हिंदू धर्म में नवरात्रि पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यताओं के मुताबिक, प्रभु राम ने भी लंका पर विजय पानी के लिए देवी मां की पूजा की थी। तो आइए आज जानते हैं कि चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की अराधना का क्या महत्व है।
इन मंत्रों के साथ करें मां शैलपुत्री की उपासना
1. वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
2. या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
3. वन्दे वांच्छित लाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्
4. शिवरूपा वृष वहिनी हिमकन्या शुभंगिनी
पद्म त्रिशूल हस्त धारिणी
रत्नयुक्त कल्याणकारिणी
5. ओम् ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:
ओम देवी शैलपुत्र्यै नमः
6. बीज मंत्र- ह्रीं शिवायै नम:
मां शैलपुत्री की पूजा से घर में जल्द बजेगी शहनाई
मान्यताओं के मुताबिक, मां शैलपुत्री की पूजा करने से विवाह में आ रही सभी तरह की बाधाएं दूर हो जाती हैं। जो भी कुंवारी कन्याएं नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा करती हैं उनकी शादी में आ रही सारी अड़चनें दूर हो जाती हैं। मां शैलपुत्री को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है इसलिए उन्हें भोग में सफेद बर्फी या दूध से बनी शुद्ध मिठाई ही अर्पित करें। इसके साथ ही माता रानी को सफेद फूल और सफेद वस्त्र चढ़ाएं। मां शैलपुत्री की उपासना करने से माता रानी अच्छी सेहत का भी आशीर्वाद देती हैं।
