06 June, 2026 (Saturday)

रूस यूक्रेन जंग के बीच महाशक्तियों के बीच शुरू हुई तेल-गैस पर कूटनीति, जानें क्‍या है पूरा मामला

रूस और यूक्रेन जंग के बीच यूरोपीय संघ और रूस के बीच तेल और गैस पर सियासत शुरू हो गई है। आखिर यूरोपीय देशों और रूस के बीच तेल और गैस का क्‍या कनेक्‍शन है। रूस और यूक्रेन जंग में तेल और गैस पर सियासत क्‍यों शुरू हो गई है। इसमें अमेरिका क्‍यों एक बड़ा फैक्‍टर है। यूरोपीय देशों और रूस से इसका क्‍या लिंक है। आइए जानते हैं कि जंग के बीच तेल और गैस पर कूटनीति क्‍यों तेज हो गई है।

1- रूस से खफा अमेरिका ने रूस से आयात किए जाने वाले तेल और गैस पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय किया है। उधर, ब्रिटेन ने भी कहा है कि वह रूसी तेल की खरीद को आने वाले समय में बंद कर देगा। यूरोपीय संघ ने रूस से आयात में कटौती का ऐलान किया है। खास बात यह है कि यह कदम रूस की ओर से जारी की गई उस चेतावनी के बाद उठाया गया है, जिसमें रूस की पुतिन सरकार ने कहा था कि अगर तेल के व्यापार पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो वह यूरोपीय देशों की गैस आपूर्ति बंद कर देगा।

2- यूक्रेन की ओर से कठोर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग उठने के बाद अमेरिका के इस फैसले से रूस पूरी तरह से बौखला गया है। अमेरिका ने कहा कि वह रूस से तेल, गैस और कोयला आयात पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाएगा। अमेरिका के रुख का समर्थन करते हुए ब्रिटेन ने भी इस वर्ष के अंत तक रूसी तेल से छुटकारा पाने का निर्णय किया है। यूरोपीय संघ रूसी गैस आयात में दो तिहाई कटौती कर रहा है। प्रो हर्ष वी पंत का कहना है कि तेल और गैस रूसी अर्थव्‍यवस्‍था के लिए काफी अहम है। अमेरिका और यूरोपीय देश रूस पर दबाव बनाने के लिए इस तरह का कदम उठा रहे हैं। इस क्रम में ब्रितानी सरकार ने कहा है कि इस अवधि में उन्‍हें आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत तलाशने के समय मिल जाएगा।

3- अमेरिका और यूरोपीय संघ के इस फैसले के बाद रूस ने कहा है कि रूसी तेल प्रतिबंधित करने का फैसला वैश्विक बाजार पर बेहद खराब प्रभाव डालेगा। रूस ने कहा है कि दुनिया भर में तेल और गैस के दाम पहले से ही बढ़ रहे हैं, अगर रूस निर्यात पर रोक लगाता है तो इन चीजों के दामों में तेज बढ़त देखने को मिल सकती है। इससे दुनिया भर में आवश्‍यक चीजों के दामों में और वृद्धि होगी।

रूस विश्‍व भर में तेल का तीसरा सबसे बड़ा उत्‍पादक

रूस विश्‍व भर में तेल का तीसरा सबसे बड़ा उत्‍पादक है। इससे पहले अमेरिका और सऊदी अरब का नंबर आता है। रूस हर रोज पांच मिलियन बैरल कच्‍चे तेल का उत्‍पादन करता है। इससे आधे से ज्‍यादा मात्रा यूरोप को जाती है। ब्रिटेन अपनी तेल की खपत का आठ फीसद हिस्‍सा रूस से आयात करता है। हालांकि, अमेरिका रूस पर इतना निर्भर नहीं है और साल 2020 में अमेरिका ने रूस से अपनी कुल खपत का मात्र तीन फीसद तेल आयात किया था।

ओपेक देशों में 60 फीसद तेल

सऊदी अरब ओपेक देशों में सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। ओपेक तेल उत्पादक देशों का एक संगठन है। यह दुनिया भर में बेचे जाने वाले तेल की 60 फीसद मात्रा पैदा करते हैं। अमेरिका भी पिछले कुछ समय से लगातार सऊदी अरब से तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए कह रहा है। हालांकि, सऊदी अब तक तेल की कीमतों में कमी लाने के लिए अपना उत्पादन बढ़ाने से मना करता रहा है। रूस ओपेक देशों में शामिल नहीं है। हालांकि, वर्ष 2017 के बाद से यह ओपेक के साथ तेल उत्पादन की सीमा तय करने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे उत्पादकों की कमाई में स्थिरता रहे। उधर, अमेरिका वेनेज़ुएला पर लगाए तेल प्रतिबंधों में भी ढील देने की सोच रहा है। एक समय में वेनेज़ुएला अमेरिका को तेल देने वाले देशों में प्रमुख हुआ करता था, लेकिन वेनेज़ुएला ने हाल ही में अपना ज्‍यादातर तेल निर्यात चीन को करना शुरू कर दिया है।

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