महाशिवरात्री 2021: शिवयोग में संकल्प और सिद्ध योग में करें मंत्रों का जाप, निशिथ काल का है विशेष महत्व
महाशिवरात्रि वह पावन दिन है, जब शिवभक्त अपने आराध्य की पूजा उपासना और व्रत करके भोलेनाथ से आशीर्वाद प्राप्त कर मन चाह वर प्राप्त करते हैं। पुराणों में ऐसी कथा का वर्णन भी है कि पूर्वजन्म में में कुबेर ने अनजाने में ही महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की उपासना की ली थी। जिसके फल स्वरूप उन्हें अलग जन्म में शिव भक्ति प्राप्ति हुई और वह देवताओं के कोषाध्यक्ष बन गए।
वैसे तो हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि आती है। जिसे मास शिवरात्रि कहा जाता है। लेकिन पंचाग के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसलिए इस शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था।
शिवरात्रि में रात का महत्व
मेरठ सूरजकुंड स्थित बाबा मनोहरनाथ मंदिर की महामंडलेश्वर नीलिमानंद महाराज का कहना है कि भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह रात्रि के समय के ही हुआ था, इसलिए उत्तर भारती पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि मध्य रात्रि यानि निशिथ काल में होती है। उसी दिन को महाशिवरात्रि का दिन माना जाता है।
11 मार्च को दोपहर 2.40 बजे से चतुर्दशी तिथि लगेगी। जो मध्यरात्रि में भी रहेगी। 12 मार्च को दोपहर 3.03 बजे तिथि समाप्त हो जाएगी। इसलिए 11 मार्च को ही शिवरात्रि मनाई जाएगी। इसके साथ ही इस दिन का आरंभ शिव योग में हो रहा है। जिसे शिव उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। शिवयोग में गुरुमंत्र और पूजन का संकल्प लेना अच्छा रहेगा। लेकिन शिवयोग 11 मार्च को सुबह 9.24 बजे तक समाप्त हो जाएगा और इसके बाद सिद्ध योग आरंभ होगा। सिद्ध योग में जप, मंत्र और साधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इसलिए सिद्ध योग में मध्यरात्रि में शिव मंत्रों का जाप करना चाहिए।
