01 August, 2026 (Saturday)

बर्फ में दबे जवानों को मिनटों में खोजेगी स्मार्ट वर्दी, कानपुर के UPTTI में शुरू हुआ हाईटेक प्रोजेक्ट

कानपुर के UPTTI में सेना के लिए हाई-टेक स्मार्ट वर्दी तैयार की जा रही है। GPS से लैस यह वर्दी बर्फ में दबे या मुसीबत में फंसे जवानों की लोकेशन ट्रेस करेगी तथा भविष्य में उनके तापमान व हृदय गति की निगरानी भी करेगी।
देश की सेवा और सुरक्षा में तैनात सैनिकों के लिए उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक बड़ी और अत्याधुनिक पहल शुरू हुई है। उत्तर प्रदेश वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान (UPTTI) ऐसी स्मार्ट सैन्य वर्दी विकसित कर रहा है, जो बर्फीले इलाकों या कठिन परिस्थितियों में फंसे जवानों की लोकेशन तुरंत पता लगाने में मदद करेगी। इस तकनीक के जरिए जवान के लापता होने या बर्फ के नीचे दब जाने की स्थिति में उसकी वर्दी ही लगातार सिग्नल भेजेगी, जिससे रेस्क्यू टीम बिना अतिरिक्त उपकरणों के उसकी सटीक लोकेशन तक पहुंच सकेगी।
इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले यूपीटीटीआई के डीन एकेडमिक प्रो. मुकेश सिंह ने बताया कि यह परियोजना देश में अपनी तरह की पहली पहल होगी। इसमें पारंपरिक तरीके से सेंसर चिपकाने या अलग से फिट करने के बजाय उन्हें कपड़े की बुनाई के दौरान ही फैब्रिक के अंदर समाहित किया जाएगा। इससे वर्दी सामान्य कपड़े की तरह दिखेगी, लेकिन उसमें आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक तकनीक छिपी होगी।

उन्होंने आगे बताया कि स्मार्ट यूनिफॉर्म में जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम के साथ विशेष प्रकार की कंडक्टिव इंक, माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक चिप, एंटीना और अन्य जरूरी सेंसर लगाए जाएंगे। ये सभी सिस्टम मिलकर सैनिक की लोकेशन का सटीक डेटा भेजेंगे, जिससे बर्फबारी, हिमस्खलन या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव अभियान तेज और सुरक्षित बनाया जा सकेगा।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर यूपीटीटीआई के शोधार्थी, फैकल्टी सदस्य और रक्षा अनुसंधान से जुड़े डीएमएसआरडीई के विशेषज्ञ संयुक्त रूप से काम करेंगे। संस्थान का लक्ष्य अगले दो साल के अंदर इस स्मार्ट वर्दी का पहला कार्यशील प्रोटोटाइप तैयार करना है।

भविष्य में स्वास्थ्य पर भी रखेगी नजर
प्रो. मुकेश सिंह के अनुसार, फिलहाल परियोजना का पहला चरण सैनिक की लोकेशन ट्रैकिंग पर केंद्रित है। हालांकि आगे चलकर इस स्मार्ट वर्दी में सैनिक की शारीरिक स्थिति की निगरानी करने वाले फीचर भी जोड़े जाएंगे। इनमें शरीर का तापमान, हृदय गति, शारीरिक गतिविधियां और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों की रियल टाइम मॉनिटरिंग शामिल होगी। इससे आपात स्थिति में जवान की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी कंट्रोल सेंटर तक पहुंच सकेगी।

धोने के बाद भी नहीं होगी तकनीक खराब
वैज्ञानिकों का कहना है कि स्मार्ट वर्दी की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूती होगी। कपड़े पर विशेष कंडक्टिव इंक से इलेक्ट्रॉनिक सर्किट तैयार किए जाएंगे, जिन्हें माइक्रोचिप और जीपीएस मॉड्यूल से जोड़ा जाएगा। पूरी इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली वर्दी के भीतर सुरक्षित रहेगी। इस तकनीक को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि बार-बार धुलाई, लंबे समय तक इस्तेमाल या कठिन मौसम का भी इसकी कार्यक्षमता पर कोई असर न पड़े। यदि यह परियोजना सफल रहती है तो भविष्य में भारतीय सेना के लिए यह स्मार्ट वर्दी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। खासकर ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों और बर्फीले इलाकों में तैनात जवानों के लिए यह तकनीक राहत एवं बचाव अभियानों को पहले से कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और प्रभावी बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगी।

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