24 August, 2026 (Monday)

महाराष्ट्र में गैर-मराठी ऑटो रिक्शा-टैक्सी चालकों का विरोध, काम किया बंद, कहा- कार्रवाई के पीछे हो रही राजनीति

गैर मराठी ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालक पर अब RTO के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं। इन लोगों का कहना है कि मराठी सीखने के लिए कम से कम 6 महीने का समय दिया जाना चाहिए।
महाराष्ट्र में गैर-मराठी ऑटो रिक्शा-टैक्सी चालक RTO की कार्रवाई के खिलाफ विरोध पर उतर आए हैं। कुर्ला में रिक्शा चालकों ने काम बंद करने का आंदोलन शुरू कर दिया है। गैर-मराठी ऑटो रिक्शा-टैक्सी चालकों ने आरोप लगाया कि सरकार की इस पूरी कार्रवाई के पीछे राजनीति की जा रही है।

पहले दिया जा रहा एक महीने का नोटिस
महाराष्ट्र में गैर-मराठी रिक्शा और टैक्सी चालकों के खिलाफ RTO की मुहिम जारी है। महाराष्ट्र में जिन चालकों को मराठी भाषा नहीं आती, उन्हें पहले एक महीने का नोटिस दिया जा रहा है। एक महीने में मराठी नहीं सीखने पर उनके बैज रद्द करने की प्रक्रिया के तहत तीन महीने का नोटिस दिया जाएगा।

सड़क पर उतरे ऑटो रिक्शा चालक
इस कार्रवाई को लेकर मुंबई में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई इलाकों में चालकों ने काम बंद कर विरोध शुरू कर दिया है। मुंबई के कुर्ला में बड़ी संख्या में रिक्शा चालक सड़क पर उतर आए हैं। सैकड़ों रिक्शाएं कतार में खड़ी हैं और चालकों ने अपना काम बंद कर दिया है। रिक्शा चालकों ने इसे लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया है।

कम से कम 6 महीने का दिया जाए समय
रिक्शा चालकों का कहना है कि उन्हें मराठी सीखने में कोई परेशानी नहीं है। वे मराठी सीख भी रहे हैं, लेकिन सरकार को उन्हें कम से कम छह महीने का समय देना चाहिए, ताकि वे मराठी भाषा को ठीक से सीख सकें और बोल सकें।

मराठी बोलने पर ग्राहक उड़ाते हैं मजाक
चालकों का कहना है कि जब वे मराठी बोलने की कोशिश करते हैं तो कई बार ग्राहक उनका मजाक उड़ाते हैं। दूसरी तरफ पुलिस की कार्रवाई में उनका समय भी जाता है और जुर्माना लगने से आर्थिक नुकसान भी होता है।

गरीब रिक्शा और टैक्सी चालकों ने उठाया गंभीर सवाल
रिक्शा चालकों का सवाल है कि कार्रवाई सिर्फ गरीब रिक्शा और टैक्सी चालकों के खिलाफ ही क्यों की जा रही है? जो लोग पिछले कई दशकों से मुंबई में रिक्शा और टैक्सी चला रहे हैं। उनके खिलाफ अचानक इस तरह का अभियान क्यों शुरू किया गया है?

इस पूरी कार्रवाई के पीछे राजनीति
चालकों का आरोप है कि इस पूरी कार्रवाई के पीछे राजनीति है। गरीब रिक्शा-टैक्सी चालकों को निशाना बनाया जा रहा है। उनकी मांग है कि सरकार मराठी सीखने के लिए दी जा रही समय-सीमा को बढ़ाए।

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