नीट सुपर स्पेशियलिटी में सेवारत डाक्टरों को 50 फीसद सीटें आवंटित करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और तमिलनाडु सरकार को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नीट सुपर स्पेशियलिटी (NEET-SS-2021 exams) में आरक्षण से संबंधित तमिलनाडु सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को नोटिस जारी कर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। तमिलनाडु सरकार (Tamil Nadu govt) ने अपने फैसले में सरकारी मेडिकल कालेजों के सुपर स्पेशियलिटी कोर्स में 50 फीसद सीटें सरकारी अस्पतालों में सेवारत डाक्टरों के लिए आवंटित की हैं।
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा नीट-एसएस (सुपर स्पेशियलिटी) 2021 की परीक्षा में भाग लेने वाले कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किया है। न्यायमूर्ति बीआर गवई (BR Gavai) और न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव (L Nageswara Rao) की पीठ ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, तमिलनाडु सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया।
मालूम हो कि सात नवंबर 2020 को तमिलनाडु सरकार (Tamil Nadu govt) ने एक आदेश जारी किया था जिसमें राज्य के सेवारत सरकारी डाक्टरों के लिए सुपर स्पेशियलिटी कोर्स (super-specialty courses) में 50 फीसद सीटें आवंटित की गई थीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और तमिलनाडु सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता अमित आनंद तिवारी (Amit Anand Tiwari) पेश हुए।
इस परीक्षा का रिजल्ट फरवरी के अंत तक जारी होने की उम्मीद है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि तमिलनाडु सरकार का उक्त फैसला संविधान के अनुच्छेद-14 का स्पष्ट उल्लंघन कर रहा है क्योंकि यह कानून के विपरीत एक अनुचित वर्गीकरण बनाता है। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ताओं और अन्य उम्मीदवारों ने सूचना बुलेटिन के अनुसार परीक्षा दी है जिसमें कहा गया था कि इस तरह के आरक्षण का कोई विशेष प्रविधान नहीं है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से मौजूदा शैक्षणिक वर्ष के लिए आरक्षण प्रदान करने के सरकारी आदेश को लागू करने के लिए निषेधाज्ञा की मांग करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय में रिट याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिका में कहा गया है कि विभिन्न राज्य अपने अधिकार क्षेत्र के सरकारी मेडिकल कालेजों में सुपर स्पेशियलिटी सीटों पर अलग-अलग कोटा लगाने का प्रयास कर रहे हैं।
