11 August, 2026 (Tuesday)

थके-हारे कांवड़ियों के पैर दबाते नजर आईं IPS अधिकारी, दिल जीत रहा है VIDEO

बोल बम यात्रा पर गुप्तेश्वर मंदिर की ओर से जा रहे कांवड़ियों की परेशानी देख आईपीएस अधिकारी ने उनकी मदद की और कुछ श्रद्धालुओं के पैर दबाकर सेवा की।
पुलिस की वर्दी आमतौर पर अनुशासन, जिम्मेदारी और कानून-व्यवस्था की पहचान मानी जाती है। लेकिन ओडिशा के जयपुर में एक आईपीएस अधिकारी ने इसी वर्दी में इंसानियत और संवेदनशीलता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है।

जयपुर की एसडीपीओ अर्चिता मित्तल, आईपीएस बोल बम यात्रा पर निकले कांवड़ियों की मदद करते हुए नजर आईं। बताया गया कि अर्चिता मित्तल की ड्यूटी कांवड़ियों के यात्रा मार्ग पर लगी थी। इसी दौरान उन्होंने लंबे रास्ते तक पैदल चलने से थक चुके श्रद्धालुओं की परेशानी देखी और उनकी मदद के लिए आगे आईं।

प्रसिद्ध गुप्तेश्वर मंदिर की ओर पैदल यात्रा कर रहे बोल बम श्रद्धालु लंबे सफर के कारण काफी थक गए थे। इसी दौरान एसडीपीओ अर्चिता मित्तल ने कुछ थके हुए कांवड़ियों के पास जाकर उनकी मदद की। उन्होंने सिर्फ श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था संभालने तक अपनी जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी, बल्कि थके हुए कांवड़ियों के पैर दबाकर उनकी सेवा भी की। इस दौरान वह अपनी आधिकारिक पुलिस वर्दी में ही थीं।
अधिकारी के अंदाज ने जीता लोगों का दिल
आईपीएस अधिकारी का यह अंदाज लोगों के लिए भावुक करने वाला रहा। पुलिस अधिकारी को आमतौर पर कानून-व्यवस्था संभालते हुए देखा जाता है, लेकिन यहां एक अधिकारी श्रद्धालुओं की थकान को समझते हुए उनकी व्यक्तिगत तौर पर मदद करती नजर आईं।

बोल बम यात्रा के दौरान श्रद्धालु लंबी दूरी पैदल तय करते हैं। लगातार पैदल चलने की वजह से थकान और शारीरिक परेशानी होना उनके लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। ऐसे में यात्रा मार्ग पर तैनात पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं। अर्चिता मित्तल ने भी अपनी ड्यूटी के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था का ध्यान रखा। इसके साथ ही, उन्होंने थके हुए श्रद्धालुओं की व्यक्तिगत रूप से मदद कर संवेदनशीलता दिखाई।

एक तरफ वह पुलिस अधिकारी के तौर पर अपनी ड्यूटी निभा रही थीं, वहीं दूसरी तरफ थके हुए श्रद्धालुओं की परेशानी समझकर उनकी सेवा भी कर रही थीं। यही वजह है कि उनका यह कदम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। अर्चिता मित्तल की यह पहल यह संदेश देती है कि अधिकार और इंसानियत एक साथ चल सकते हैं। अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जरूरतमंद लोगों के प्रति संवेदनशील रहना भी सार्वजनिक सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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