10 September, 2026 (Thursday)

छत से गिरने से फेमस डायरेक्टर अनिक दत्ता की मौत, हादसा या खुदकुशी? सुसाइड नोट मिलने के बाद जांच में जुटी पुलिस

फिल्म मेकर अनिक दत्त का निधन हो गया है। घर की छत से गिरने के बाद एक्टर ने दम तोड़ दिया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। सुसाइड या हादसा, दोनों ही नजरिये से पड़ताल की जा रही है।
बंगाली सिनेमा के जाने-माने और बेहद प्रभावशाली निर्देशक व फिल्म निर्माता अनीक दत्ता का बुधवार 27 मई को कोलकाता के गरियाहाट इलाके में निधन हो गया। मिली जानकारी के अनुसार एक मकान की छत से गिरने के कारण वह गंभीर रूप से चोटिल हो गए थे। हादसे के तुरंत बाद उन्हें ढाकुरिया के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी गंभीर स्थिति बनी रहने के बाद मौत हो गई। कुछ ही पल बाद डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना स्थल से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसे जांच के लिए हैंडराइटिंग एक्सपर्ट के पास भेज दिया गया है। फिलहाल केस को सुसाइड के एंगल से देखा जा रहा है।
घटना की पृष्ठभूमि और पुलिसिया जांच
सूत्रों के मुताबिक यह दुखद घटना गरियाहाट स्थित उनकी पत्नी के आवास पर हुई, जहां अनीक दत्ता कथित तौर पर छत से नीचे गिर गए थे। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इलाके की घेराबंदी कर दी है। पुलिस ने मामले की गहन तफ्तीश शुरू कर दी है ताकि यह साफ हो सके कि यह महज एक हादसा था या इसके पीछे कोई साजिश या अन्य कारण थे। खबरों के अनुसार दत्ता की बेटी वर्तमान में विदेश में रहती हैं। उनके कोलकाता पहुंचने के बाद ही फिल्मकार के पार्थिव शरीर को पोस्टमार्टम प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा।

बंगाली सिनेमा में एक अलग पहचान
अनीक दत्ता को बंगाली फिल्म जगत में उनकी अनूठी और बेबाक शैली के लिए जाना जाता था। उन्होंने बड़े पर्दे पर अपने निर्देशन के सफर की शुरुआत फिल्म ‘भूतेर भबिश्यत’ से की थी। यह एक व्यंग्यात्मक ड्रामा फिल्म थी, जिसने राजनीति, समाज और कोलकाता की बदलती शहरी संस्कृति पर अपनी अनूठी टिप्पणी के लिए कल्ट का दर्जा हासिल किया। अपनी फिल्मों में सामाजिक टिप्पणियों के साथ हास्य और तीखे व्यंग्य का बेहतरीन मिश्रण करने के लिए वह मशहूर थे। उन्होंने अपने करियर में राजनीति, अर्थशास्त्र और समकालीन वास्तविकताओं जैसे विषयों को बेहद संजीदगी से पर्दे पर उतारा।

उल्लेखनीय फिल्में और अंतिम सिनेमाई सफर
अपने शानदार करियर के दौरान अनीक दत्ता ने कई बेहतरीन और समीक्षकों द्वारा सराही गई फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘आश्चर्य प्रदीप’, ‘मेघनाद बध रहस्य’, ‘भबिश्यतेर भूत’, ‘बोरुनबाबुुर बंधु’ और ‘अपराजितो’ शामिल हैं। इन फिल्मों ने दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों का भी दिल जीता। सिनेमाघरों में रिलीज हुई उनकी आखिरी फीचर फिल्म ‘जतो कांडो कोलकातातेई’ थी, जो पिछले साल दुर्गा पूजा के खास मौके पर बड़े पर्दे पर रिलीज हुई थी और जिसे दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी।

सत्यजीत रे का प्रभाव और व्यक्तिगत जीवन
अनीक दत्ता का जन्म 22 मई को कोलकाता के देबदूत शीत नगर में हुआ था और बचपन से ही उन्हें सिनेमा से गहरा लगाव था। उनके जीवन और काम पर महान फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे का गहरा प्रभाव था, जो उनकी कहानियों और दृश्य शैली में साफ झलकता था। उनके किरदारों की बुनावट से लेकर फिल्मों में दिखने वाले सूक्ष्म सामाजिक पहलुओं तक हर जगह सत्यजीत रे के काम की झलक और उनके प्रति सम्मान साफ दिखाई देता था। इस गहरे प्रभाव के बावजूद, अनीक दत्ता ने अपने तीखे हास्य और व्यंग्य-प्रधान विमर्श के दम पर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी एक बिल्कुल अलग और स्वतंत्र पहचान बनाई थी।

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