राम मंदिर में चढ़ावा गिनने का Exclusive Duty Chart आया सामने, चंपत राय के कहने पर अनिल मिश्रा ने RSS-VHP से जुड़े लोगों को रखा
राम मंदिर चढ़ावा काउंटिंग का ड्यूटी चार्ट सामने आया है। पैसे गिनने वालों को चंपत राय के कहने पर अनिल मिश्रा ने काम पर रखा था। ये सभी आरएसएस और विहिप से जुड़े हुए लोग थे।
अयोध्याः राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इंडिया टीवी के हाथ कैश काउंटिंग के लिए मार्च 2025 में काम रखे गए 10 नए लोगों की जानकारी हाथ लगी है। जानकारी के मुताबिक, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अनिल मिश्रा को काफी पावर दे रखी थी। ट्रस्ट ने कैश काउंटिंग के लिए मार्च-2025 में 10 नये लोगों को काम पर रखा था। ये सभी लड़के संघ और विश्व हिन्दू परिषद से जुड़े हुए थे।
चंपत राय के कहने पर अनिल मिश्रा ने काम पर रखा
चंपत राय ने अनिल मिश्रा के पास इन सभी को भेजा था। अनिल मिश्रा ने सभी का इंटरव्यू लिया और काम पर रखा। 2 मार्च को चंपत राय ने कैश काउंटिंग के लिए लोगों को बुलाया और अनिल मिश्रा से मिलने को कहा। ये लोग 4 मार्च को अनिल मिश्रा से मिलने गए। 6 मार्च 2025 को 10 लोगों की हायरिंग हुई और सब काम पर लग गए। शुरुआत में कोई आई-कार्ड तक नहीं बना था। उन्हें एक ड्यूटी शीट दी गई थी, उसी को दिखा कर मंदिर परिसर में एंट्री हो जाती थी।
18 हजार रुपये वेतन के तौर पर मिलते थे
सभी नये लड़कों को ट्रस्ट से 18,000 रुपये सैलरी मिलती थी। ड्यूटी का समय 9 बजे से 5 बजे तक था। दोपहर 1:30 बजे लंच होता था। चढ़ावे की काउंटिंग एक जगह नहीं दो जगह होती थी। कुंभ के बाद श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंच रही थी और चढ़ावा कई गुना बढ़ गया था। ऐसे में दो काउंटिंग सेंटर बनाए गए। एक काउंटिंग रूम मंदिर परिसर के भीतर PFC (pilgrim facilation centre) बिल्डिंग में और दूसरा काउंटिंग सेंटर परिसर के भीतर स्थित पुलिस चौकी में बना था।
यहां पर लगी इन लोगों की ड्यूटी
नये दस लड़कों को पुलिस चौकी वाले काउंटिंग रूम में नोटों को छांट कर गड्डियां बनाने और उसको मशीनों से गिनने का काम दिया गया। अनुकल्प, अविनाश, करुणेश और लव कुश पुलिस चौकी में कैश काउंटिंग ड्यूटी में होते थे। स्वतंत्र पांडे, रविंद्र नाथ, तरुण मालवीय और हिमांशु त्रिपाठी के नौकरी छोड़ने के बाद मनीष यादव और रमा शंकर की एंट्री कैश काउंटिंग रूम में हुई। PFC बिल्डिंग के बेसमेंट में मेन काउंटिंग सेंटर- मॉनिटरिंग रूम, स्टाफ़ भोजनालय और SBI काउंटर है। पहरेदारी में SIS सिक्योरिटी वाले होते हैं और कभी कभी CRPF वाले भी आते थे।
कैश गिनती की नहीं होती थी निगरानी
मॉनिटरिंग रूम में 2-3 लोगों की ड्यूटी रहती थी लेकिन सब बाहर ही घूमते रहते थे। कोई बहुत ध्यान से काउंटिंग प्रोसेस की मॉनिटरिंग नहीं कर रहा था। कैश चोरी के लिए पूरी गुंजाइश थी। दस लोग जो काउंटिंग में ट्रस्ट की ओर से लगाए गए थे। वो पुलिस चौकी में बैठ कर गिनती का काम करते थे। कैमरा भी वहीं और मॉनिटर(स्क्रीन) भी उसी रूम में लगा था। वहां पर कोई निगरानी नहीं होती थी।
टिन्नू यादव मंदिर के सर्वराकार के तौर पर काम कर रहा था। वह जो चाहता था वही होता था। सुभाष श्रीवास्तव (रिटायर्ड बैंक कर्मी और आरोपी) इंचार्ज थे। बक्से से कैश निकलवाना, काउंटिंग रूम तक पहुंचाना और उसको SBI को हैंडओवर करने तक सुभाष की जिम्मेदारी थी। ज्वैलरी का कोई हिसाब किताब कभी नहीं रखा गया। चोरी करना बहुत आसान था।
चोरी की शिकायत पर इंचार्ज का था चौंकाने वाला जवाब
बता दें कि चोरी का पहली बार पता फरवरी में चला था और काउंटिंग टीम के ही सदस्य ने इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव को जा कर बताया कि पैसे चोरी किए जा रहे हैं। सुभाष श्रीवास्तव का जवाब था- “प्रभु देख ही रहे हैं कौन सा हमारे आपके घर से जा रहा है”।
