20 June, 2026 (Saturday)

हिमाचल में सरकारी आवास पर विवाद: DIG को ₹1.80 लाख का नोटिस भेजा, वेतन से वसूली की चेतावनी दी

संजीव गांधी ने 7 फरवरी को शिमला एसपी का पद छोड़ दिया था। उन्हें 7 मार्च तक आवास में रहने की अनुमति थी। हालांकि, वह अभी भी आवास में रह रहे हैं। उनका कहना है कि जीएडी की तरफ से उन्हें अकोमोडेशन नहीं मिली, इसलिए आवास खाली नहीं किया है।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सरकारी आवास पर बवाल मचा हुआ है। हिमाचल पुलिस मुख्यालय ने डीआईजी को नोटिस भेजकर 1.80 लाख रुपये डैमेज चार्ज जमा करने को कहा है। वहीं, पैसे नहीं जमा करने पर उनके वेतन से वसूली करने की चेतावनी दी है। हिमाचल के डीआईजी संजीव गांधी पर ₹1.80 लाख का डैमेज चार्ज लगाया गया है। सरकारी आवास खाली न करने पर उन्हें यह नोटिस भेजा गया है।
हिमाचल पुलिस मुख्यालय ने डीआईजी (टीटीआर) को सरकारी आवास खाली न करने के मामले में 1.80 लाख रुपये से अधिक का डैमेज चार्ज जमा करने का नोटिस जारी किया है। यह आवास शिमला के पुलिस अधीक्षक के लिए निर्धारित बताया गया है।

7 मार्च तक खाली करना था आवास
नोटिस के अनुसार, संजीव गांधी ने 7 फरवरी 2026 को शिमला एसपी का पदभार छोड़ा था। नियमों के तहत उन्हें 7 मार्च तक आवास में रहने की अनुमति थी। इसके बाद आवास पर उनका कब्जा अनधिकृत श्रेणी में माना गया। पुलिस मुख्यालय ने दावा किया है कि 12 मई को आवास खाली करने के लिए नोटिस दिया गया था, लेकिन निर्धारित समय तक आवास खाली नहीं किया गया। इसी आधार पर हिमाचल प्रदेश अलॉटमेंट ऑफ गवर्नमेंट रेजिडेंसेज (जनरल पूल) रूल्स-1994 के तहत मार्च, अप्रैल और मई 2026 की अवधि के लिए कुल ₹1,80,286 का डैमेज चार्ज लगाया गया है।

आवास खाली करने के निर्देश
नोटिस में चेतावनी दी गई है कि राशि जमा न करने की स्थिति में इसे वेतन से वसूल किया जा सकता है। साथ ही 1 जून 2026 से आवास खाली होने तक अतिरिक्त डैमेज चार्ज भी लागू रहेगा। प्रशासन ने आवास तत्काल खाली कर उसका कब्जा शिमला एसपी को सौंपने के निर्देश दिए हैं।

जीएडी ने नहीं दी अकोमोडेशन
डीआईजी संजीव गांधी से जब इस नोटिस को लेकर उनका पक्ष पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह नोटिस अब तक उन्हें नहीं मिला। मीडिया के माध्यम से इसकी सूचना मिली है। यह डैफेमेटरी है, इसे चेलेंज किया जाएगा। उनकी छवि को खराब करने के लिए ऐसा किया जा रहा है और उन्हें ईमानदारी से काम करने की सजा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जीएडी की तरफ से उन्हें अकोमोडेशन नहीं मिली, इसलिए आवास खाली नहीं किया।

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