31 July, 2026 (Friday)

जंगल में भालू ने किया हमला, आधी रात मदद के लिए पहुंची मेडिकल टीम, 18 किमी तक स्ट्रेचर पर ढोया और बचा ली जान

घायल युवक की मदद के लिए मेडिकल टीम जंगल में पहुंची। वहां, प्राथमिक उपचार किया और रात गुजारी। अगली सुबह घायल युवक को स्ट्रेचर पर लेकर 18 किलोमीटर तक पैदल चले और उसे अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचा ली।
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में मेडिकल टीम ने मानवता का परिचय देते हुए जंगल में घायल युवक की जान बचा ली। यह युवक जंगल के अंदर भालू के हमले में घायल हुआ था। वह चलने की स्थिति में नहीं था। ऐसे में पहले मेडिकल टीम जंगल के अंदर पहुंची और प्राथमिक उपचार किया। इसके बाद जंगल में ही रात गुजारी और अगली सुबह घायल युवक को लेकर 18 किलोमीटर तक चले। जंगल से बाहर आने के बाद युवक को अस्पताल पहुंचाया गया और उसे उचित इलाज मिलने से जान बच गई।

मूसलाधार बारिश के कारण चारों ओर के रास्ते पानी से कट गए थे। ऐसी विषम परिस्थितियों में किसी भी वाहन का पहुंचना संभव नहीं था, वहां स्वास्थ्य विभाग की टीम, आशा कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने अपने साहस, समर्पण और मानवता का परिचय देते हुए घायल युवक की जान बचा ली। इन लोगों ने करीब 18 किलोमीटर तक फोल्डेबल स्ट्रेचर कंधों पर उठाकर पैदल सफर तय किया और घायल को अस्पताल पहुंचाया गया।

जंगल में भालू ने किया हमला
यह घटना गड़चिरौली जिले के भामरागढ़ तालुका के अतिदुर्गम बिनागुंडा–दामणमार्का क्षेत्र की है। छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा पर बसे इस इलाके में लगातार हो रही बारिश के कारण सड़कें और नाले पूरी तरह जलमग्न थे। इसी बीच बिनागुंडा निवासी पोरिया गोगा तिम्मा (35) अपनी बहन से मिलने दामणमार्का गांव जा रहे थे। रास्ते में अचानक जंगल से निकले एक भालू ने उन पर हमला कर दिया। हमले में उनके दोनों पैरों में गंभीर चोटें आईं और वे जंगल में ही असहाय अवस्था में फंस गए।

मुश्किल हालातों पर भी नहीं हारी हिम्मत
घटना की जानकारी मिलते ही बिनागुंडा उपकेंद्र की स्वास्थ्य सेविका अश्विनी सहारे, स्वास्थ्य सेवक रामटेके तथा आशा कार्यकर्ताओं ने बिना समय गंवाए घटनास्थल की ओर रुख किया। कठिन रास्तों को पार करते हुए टीम रात में ही घायल तक पहुंची और प्राथमिक उपचार देकर उनकी स्थिति को नियंत्रित किया। अगली सुबह मौसम की चुनौती और बाढ़ की स्थिति के बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने फोल्डेबल स्ट्रेचर की मदद से घायल युवक को करीब 18 किलोमीटर पैदल उठाकर गुंडेनूर नाले तक पहुंचाया। रास्ते में कई जगह घने जंगल, कीचड़ और फिसलन भरे मार्ग थे, लेकिन किसी ने भी हिम्मत नहीं हारी।
भामरागढ़ रेफर हुआ घायल
गुंडेनूर नाले में तेज बहाव होने के कारण वहां तक कोई वाहन नहीं पहुंच सकता था। ऐसे में स्वास्थ्य टीम और ग्रामीणों ने जोखिम उठाते हुए बहते पानी के बीच से घायल को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद एंबुलेंस की सहायता से उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, लाहेरी पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया। बाद में बेहतर इलाज के लिए उन्हें ग्रामीण अस्पताल, भामरागढ़ रेफर कर दिया गया।

मिसाल बना रेस्क्यू ऑपरेशन
भामरागढ़ मुख्यालय से लगभग 36 किलोमीटर दूर स्थित अबूझमाड़ क्षेत्र में इस तरह का राहत अभियान आसान नहीं माना जाता। लगातार बारिश, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां और संचार सुविधाओं की कमी के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जिस तत्परता और साहस के साथ यह अभियान पूरा किया, वह मिसाल बन गया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्वास्थ्य विभाग की टीम समय पर नहीं पहुंचती, तो घायल युवक की जान बचाना मुश्किल हो सकता था। स्वास्थ्य कर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से एक परिवार को बड़ा दुख झेलने से बचा लिया गया।

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