05 June, 2026 (Friday)

Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai Review: वरुण की हाई एनर्जी और डेविड धवन का पुराना फॉर्मूला, जानें कैसी है बाप-बेटे की ‘कन्फ्यूजन’ कॉमेडी

‘है जवानी तो इश्क होना है’ रिव्यू: डेविड धवन एक बार फिर अपने पुराने फॉर्मूले के साथ लौट आए हैं। वरुण धवन की हाई एनर्जी इस बार भी देखने को मिल रही है। फिल्म कैसी है और दो पत्नी और प्रेग्नेंसी का झोल लोगों को कितना लुभाएगा जानने के लिए नीचे स्क्रोल करे
आज के दौर में एक तरफ गंभीर और डार्क मुद्दों पर फिल्में बन रही हैं, वहीं दूसरी तरफ दर्शकों का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो थियेटर सिर्फ हंसने-मुस्कुराने और दिमाग को थोड़ी देर के लिए आराम देने जाता है। इसी हफ्ते बॉक्स ऑफिस पर कुछ ऐसी फिल्में आई हैं जो कंसेंट जैसे गंभीर विषय को छूती हैं, लेकिन अगर आप सोच रहे हैं कि वरुण धवन और डेविड धवन की जोड़ी की नई फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ भी किसी गंभीर विमर्श में उलझने वाली है तो आप बिल्कुल गलत हैं। इस बाप-बेटे की जोड़ी का सिर्फ एक ही मकसद है, आपको गुदगुदाना और सिनेमा हॉल से हंसते हुए बाहर भेजना। लगभग दो साल बाद वापसी कर रही यह जोड़ी अपने पुराने, परखे हुए नो-ब्रेन एंटरटेनमेंट के साथ लौटी है। यह पूरी तरह से ठेठ बॉलीवुडिया कहानी है, जिसे दर्शकों की नब्ज पहचानने वाले इंसानों ने सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन के लिए लिखा है।

क्या है ‘है जवानी तो इश्क होना है’ का प्लॉट?
फिल्म की कहानी घूमती है जस (वरुण धवन) के इर्द-गिर्द, जिसकी जिंदगी में तब भूचाल आता है जब उसकी पत्नी बानी (मृणाल ठाकुर) उसे सिर्फ इसलिए तलाक देने पर मजबूर कर देती है क्योंकि वह जस की ‘शारीरिक भूख’ और बच्चे पैदा करने की बेताबी को संभाल नहीं पाती। मजेदार बात यह है कि पूरी फिल्म में ‘सेक्स’ शब्द को इतनी अजीब तरह से ‘मेकिंग लव’ से डब किया गया है, जैसे यह कोई बहुत बड़ा गुनाह हो। खैर बानी से अलग होने के बाद जस की जिंदगी में प्रीत (पूजा हेगड़े) की एंट्री होती है। कहानी में असली और मजेदार मोड़ तब आता है जब किस्मत का ऐसा चक्कर चलता है कि जस की पूर्व पत्नी बानी और मौजूदा गर्लफ्रेंड प्रीत, दोनों एक साथ प्रेग्नेंट हो जाती हैं और दोनों के बच्चों का पिता कोई और नहीं बल्कि जस ही है।

इसके बाद लंदन की खूबसूरत लोकेशंस पर कन्फ्यूजन और भागदौड़ का जो रायता फैलता है, वही इस फिल्म का मुख्य प्लॉट है। फिल्म अपने ‘नॉनसेंस’ और बिना लॉजिक वाले अंदाज को गर्व से स्वीकार करती है, लेकिन डेविड धवन की फिल्मों के हिसाब से भी इसका पहला हाफ बेहद सुस्त, शुरुआत के एक घंटे में थोड़ा भटकाव है। थियेटर में सन्नाटा पसरा रहता है क्योंकि फरहाद सामजी के लिखे शुरुआती चुटकुले और डायलॉग्स उतने कारगर नहीं लगते, ये कई बार जबरदस्ती हंसाने की कोशिश जैसे लगने लगते हैं।
हालांकि इसके कुछ जोक्स थोड़े एडल्ट और डबल मीनिंग वाले हैं, लेकिन वे शालीनता की सीमा पार नहीं करते। जैसे जब मौनी रॉय फिल्म में वरुण की नकली मां बनकर आती हैं तो वरुण का एक डायलॉग है, ‘मां मांगी थी निरूपा रॉय जैसी, तूने मौनी रॉय जैसी भेज दी!’ ऐसे कुछ वन-लाइनर्स थियेटर में जान फूंक देते हैं।

कैसी है सितारों की परफॉर्मेंस?
परफॉर्मेंस की बात करें तो वरुण धवन एक बार फिर अपनी सुपरहिट फिल्म ‘मैं तेरा हीरो’ वाले पुराने अवतार में नजर आ रहे हैं और कॉमेडी के मामले में उनका कोई सानी नहीं है। वह पूरी फिल्म में अपनी गजब की एनर्जी, लाजवाब कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेजेंस से जान फूंक देते हैं। लंदन की सड़कों पर उनका डरकर भागना, गिरना-संभलना और चेहरे के फनी एक्सप्रेशंस दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करते हैं।

फिल्म में जस के दोस्त बने मनीष पॉल को स्क्रीन पर बहुत कम समय मिला है, जो कि थोड़ा खटकता है। उनका किरदार उनकी पिछली फिल्मों जैसा ही लगता है, जिससे उन्हें कुछ नया करने का मौका नहीं मिला, लेकिन वरुण के साथ उनकी केमिस्ट्री और जुगलबंदी देखने लायक है। हीरोइनों की बात करें तो मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े को अच्छी तरह पता था कि इस तरह की मसाला फिल्मों में उनका क्या काम है। दोनों को स्क्रीन पर खूबसूरत और ग्लैमरस दिखना था, गानों पर डांस करना था और वरुण के पागलपन पर रिएक्ट करना था और दोनों ने ही अपना काम पूरी ईमानदारी और खूबसूरती से किया है।

स्पेशल अपीयरेंस और सपोर्टिंग कास्ट में जिमी शेरगिल, प्रीत के ओवरप्रोटेक्टिव भाई के रूप में हर समय बंदूक ताने और गंभीर चेहरा बनाए दिखते हैं, जो स्थिति को और मजेदार बनाता है। इनके अलावा चंकी पांडे, राकेश बेदी और मौनी रॉय जैसे कलाकारों ने भी छोटे लेकिन एंटरटेनिंग किरदारों से फिल्म के दूसरे हाफ को काफी मजबूत किया है।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष
डेविड धवन ने एक बार फिर साबित किया है कि वो कमर्शियल और हल्के-फुल्के पारिवारिक सिनेमा के किंग हैं। उन्होंने किसी ट्रेंड के पीछे भागने के बजाय अपने उसी पुराने और परखे हुए ‘धवन फॉर्मूले’ पर भरोसा जताया। कैमरे का काम और फिल्म का लुक काफी ग्रैंड और रंग-बिरंगा है, जो आंखों को अच्छा लगता है। फिल्म का एक बड़ा प्लस पॉइंट इसका बैकग्राउंड स्कोर और पुराने गानों का इस्तेमाल है। जैसे ही ‘चुनरी चुनरी’ जैसा पुराना हिट गाना बजता है, थियेटर में पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं और यह फिल्म के मूड के साथ बिल्कुल सटीक बैठता है।

लेकिन तकनीकी तौर पर फिल्म में कुछ बड़ी कमियां भी हैं। पहला हाफ जहां बेहद सुस्त और खिंचा हुआ लगता है, वहीं दूसरा हाफ मजेदार होने के बावजूद क्लाइमेक्स तक आते-आते इतना लंबा हो जाता है कि लगने लगता है कि मेकर्स इसे जबरदस्ती खींच रहे हैं। इसके अलावा, फिल्म में आज के दौर में भी बॉडी-शेमिंग और टॉयलेट ह्यूमर का सहारा लिया गया है, जैसे एक भारी-भरकम किरदार का नाम सिर्फ मजाक बनाने के लिए ‘टिनी’ रख दिया गया। यह थोड़ा पुराना और आलस से भरा हुआ लेखन लगता है जिससे बचा जा सकता था।

वर्डिक्ट
‘हाई जवानी तो इश्क होना है’ कोई ऐसी फिल्म नहीं है जो सिनेमा की दुनिया को बदल देगी या जिसे देखकर आप घर पर कोई गहरा संदेश लेकर जाएंगे। यह एक ठेठ, पुरानी यादों को ताजा करने वाली कमर्शियल मसाला फिल्म है, जो सिर्फ एक शर्त पर चलती है कि थियेटर में घुसने से पहले आप अपना दिमाग घर पर छोड़कर आएं। हालांकि फिल्म का पहला भाग काफी कमजोर है और इसकी लंबाई जरूरत से ज्यादा है, लेकिन सेकेंड हाफ में आने वाला पागलपन, वरुण धवन की कमाल की परफॉर्मेंस और मजेदार कन्फ्यूजन इस फिल्म को डूबने से बचा लेते हैं। अगर आप इस वीकेंड बिना किसी लॉजिक के सिर्फ हंसना चाहते हैं और डेविड धवन के सिनेमा के फैन रहे हैं तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।

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