06 June, 2026 (Saturday)

‘मुझे आपसे न्याय की उम्मीद नहीं’, अब मनीष सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्णकान्ता को लिखा पत्र, आज से सत्याग्रह भी शुरू

अरविंद केजरीवाल के बाद अब मनीष सिसोदिया खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने भी जस्टिस स्वर्णकान्ता को पत्र लिखा है। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया आज राजघाट पहुंच कर सत्याग्रह करेंगे।
दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के बाद पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने भी जस्टिस स्वर्णकान्ता शर्मा को पत्र लिखा है। दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकान्ता शर्मा को लिखे पत्र में मनीष सिसोदिया ने कहा कि मुझे आपसे न्याय की उम्मीद नहीं है। ये पूरा मामला दिल्ली की आबकारी नीति से जुड़ा हुआ है।

मेरे पास सत्याग्रह के अलावा कोई विकल्प नहीं
पार्टी सूत्रों के अनुसार, सिसोदिया ने अपने पत्र में कहा , ‘मेरी तरफ से भी कोई वकील पेश नहीं होगा। आपके बच्चों का भविष्य तुषार मेहता जी के हाथों में है। ऐसी स्थिति में मुझे आपसे न्याय की कोई उम्मीद नहीं है। मेरे पास सत्याग्रह के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।’ यह घटनाक्रम केजरीवाल द्वारा पहले लिखे गए इसी तरह के पत्र के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने कानूनी कार्यवाही पर चिंता व्यक्त की थी।

केजरीवाल ने कहा, मुझे न्यायपालिका पर अटूट विश्वास
आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस मुद्दे पर अपना रुख बरकरार रखा है और प्रक्रिया में पक्षपात का आरोप लगाया है। केजरीवाल ने न्यायाधीश और न्यायपालिका दोनों के प्रति अत्यंत सम्मान व्यक्त करते हुए पत्र में कहा कि उनका निर्णय अवज्ञा से नहीं बल्कि अंतरात्मा से प्रेरित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि न्यायपालिका संस्था में उनका विश्वास अटूट है। हालांकि, उन्होंने इस मामले में निष्पक्षता को लेकर आशंकाएं व्यक्त की हैं।

केजरीवाल और सिसोदिया आज पहुंचेंगे राजघाट
वहीं, अब आम आदमी पार्टी के दोनों ही शीर्ष नेता सत्याग्रह करेंगे। आज दोपहर 12 बजे अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया राजघाट जाएंगे। इस दौरान उनके साथ पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद रह सकते हैं।

दोनों ही नेता कोर्ट में नहीं होंगे पेश
बता दें कि न तो मनीष सिसोदिया कोर्ट में पेश होंगे और न ही उनकी तरफ से कोई भी वकील स्वर्णकान्ता शर्मा की अदालत में पेश होगा। यह घटनाक्रम दिल्ली हाई कोर्ट की जज स्वर्णकांता शर्मा को मामले से अलग करने की केजरीवाल की याचिका खारिज करने के कुछ ही समय बाद सामने आया है। अपने फैसले में न्यायालय ने कहा कि आरोप पूर्वाग्रह की उचित आशंका की कानूनी सीमा को पूरा नहीं करते और सबूतों के बजाय अनुमान पर आधारित हैं।

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