06 June, 2026 (Saturday)

पीएम मोदी आज करेंगे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, जानिए क्यों खास है यह प्रोजेक्ट?

करीब 213 किलोमीटर लंबे इस छह लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के शुरू होने से दिल्ली से देहरादून के सफर का समय घटकर आधा हो जाएगा। अभी इस सफर में 6 घंटे से ज्यादा का समय लगता है लेकिन इस एक्सप्रेसवे से सफर का समय घटकर लगभग ढाई घंटे रह जाएगा।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बने 213 किलोमीटर लंबे दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। यह हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे न केवल दिल्ली और उत्तराखंड के बीच की दूरी को समय के लिहाज से आधा कर देगा, बल्कि यह आधुनिक इंजीनियरिंग और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा उदाहरण भी है। पीएम मोदी हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे के ‘एलिवेटेड सेक्शन’ पर वन्यजीव मार्ग की भी समीक्षा करेंगे।
ढाई घंटे में सफर होगा पूरा
अभी दिल्ली से देहरादून जाने में 6 घंटे से अधिक का समय लगता है, लेकिन इस एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर के शुरू होने के बाद दिल्ली-देहरादून का यह सफर घटकर महज ढाई का घंटे रह जाएगा। इससे लोगों को काफी राहत मिलेगी। यह कॉरिडोर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के आर्थिक और पर्यटन केंद्रों को सीधे जोड़ेगा।

मां डाट काली मंदिर में पूजा
प्रधानमंत्री मोदी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कॉरिडोर के एलिवेटेड सेक्शन पर बने वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का निरीक्षण भी करेंगे। इसके बाद वे देहरादून के पास स्थित माँ डाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे और फिर एक जनसभा में इस परियोजना का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।
पर्यटन और व्यापार में अहम भूमिका
यह इकोनॉमिक कॉरिडोर पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा। परियोजना के तहत 10 इंटरचेंज, 3 रेलवे ओवर ब्रिज, 4 बड़े पुल और 12 वे-साइड सुविधाएं विकसित की गई हैं। साथ ही, इसमें एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) लगाया गया है, जिससे यात्रा और अधिक सुरक्षित और सुगम होगी।

प्रोजेक्ट की खासियत
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका इको-फ्रेंडली डिजाइन है। राजाजी नेशनल पार्क और संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों को देखते हुए इसमें 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बनाया गया है, जो एशिया में अपनी तरह का सबसे लंबा कॉरिडोर है। इसमें वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए 8 एनिमल पास बनाए गए हैं। हाथियों के लिए 200-200 मीटर के दो अंडरपास तैयार किए गए हैं। इसके अलावा 370 मीटर लंबी टनल का निर्माण किया गया है। यह परियोजना आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण संतुलन का एक बेहतरीन उदाहरण मानी जा रही है, जो क्षेत्र में आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा करेगी।

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