05 June, 2026 (Friday)

भारत और अमेरिका में बढ़ेगा न्यूक्लियर सहयोग, ऊर्जा साझेदारी होगी और मजबूत

भारत-अमेरिका के बीच न्यूक्लियर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। इससे भारत में ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी। भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने वाशिंगटन में अमेरिका के ऊर्जा सचिव के साथ इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण बैठक की है।
वाशिंगटन: भारत और अमेरिका ने न्यूक्लियर सहयोग बढ़ाने की दिशा महत्वपूर्ण बैठक की है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट के साथ बैठक में परमाणु ऊर्जा, कोल गैसीकरण और एलपीजी निर्यात जैसे नए क्षेत्रों में ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। मिश्री और राइट के बीच हुई चर्चा “ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार को गहरा करने और भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करने के नए रास्ते तलाशने” पर केंद्रित रही। भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी।
एलपीजी निर्यात पर भी बड़ा फैसला
बैठक में मौजूद भारत में अमेरिकी राजदूत सर्गेई गोर ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ सिविल न्यूक्लियर सहयोग के अलावा कोल गैसीकरण और अमेरिकी एलपीजी निर्यात जैसे अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग करने को तैयार है। राजदूत गोर ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “आज सुबहक्रिस राइट और विदेश सचिव विक्रम मिश्री के साथ यूएस-इंडिया ऊर्जा सहयोग के भविष्य पर चर्चा करना बहुत अच्छा लगा। भारत द्वारा SHANTI बिल के ऐतिहासिक पारित होने के बाद, हम कोल गैसीकरण और अमेरिकी एलपीजी निर्यात जैसे अन्य क्षेत्रों के अलावा सिविल न्यूक्लियर सहयोग पर भी सहयोग करने को तैयार हैं।”शुक्रवार रात को उन्होंने फ्लोरिडा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मार-ए-लागो रिसॉर्ट में विक्रम मिश्री का स्वागत किया।

मिसरी का स्वागत सौभाग्य की बात
अमेरिकी राजदू ने गोर ने सोशल मीडिया पर लिखा, भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी का आज रात मार-ए-लागो में स्वागत करना सौभाग्य की बात रही! व्यापार, रक्षा और ऊर्जा से लेकर सभी क्षेत्रों में भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका आने वाले महीनों और वर्षों में करीब से साथ काम करने को तैयार हैं।”

SHANTI Act क्या है?

सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी एक्ट (SHANTI Act) को भारत के सिविल न्यूक्लियर क्षेत्र में अब तक का सबसे व्यापक सुधार माना जा रहा है। यह कानून पिछले दिसंबर में लागू हुआ था, जिसने निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए सख्ती से नियंत्रित सिविल न्यूक्लियर क्षेत्र को खोल दिया है। इसने 1962 के एटॉमिक एनर्जी एक्ट और 2010 के सिविल लायबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज (CLND) एक्ट को भी निरस्त कर दिया है। विदेश सचिव विक्रम मिश्री मंगलवार देर रात अमेरिका पहुंचे थे और तीन दिवसीय दौरे पर हैं। उन्होंने रक्षा, वाणिज्य और विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की है। बुधवार को उन्होंने विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भी मुलाकात की।

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