20 March, 2026 (Friday)

Ujjain News : महाकाल मंदिर की 2000 साल पुरानी परंपरा का पुनरुद्धार

गुड़ी पड़वा के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पर 2000 साल पुरानी परंपरा का पुनरुद्धार किया जाएगा। मध्य प्रदेश सरकार इस परंपरा को फिर से भव्य रूप देने जा रही है। यह गौरवशाली परंपरा सम्राट विक्रमादित्य के समय से चली आ रही है।

विक्रमादित्य द्वारा शुरू किया गया विक्रम संवत और ब्रह्म ध्वज की परंपरा भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक श्रेष्ठता का प्रतीक है। आपको बता दें कि 19 मार्च को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा और गुड़ी पड़वा के अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर ब्रह्म ध्वजा फहराया जाएगा।

ब्रह्म ध्वज की बनावट है विशिष्ट
ब्रह्म ध्वज की विशिष्टता बताते हुए विक्रमादित्य शोध संस्थान के निदेशक राम तिवारी ने बताया कि यह शक्ति, साहस और चतुर्दिक विजय का प्रतीक है। इसकी बनावट भी विशेष होती है। केसरिया रंग के ध्वज में दोनों छोर पर दो पताकाएं होती हैं। इसके बीच में स्थित सूर्य का चिन्ह तेज, ऊर्जा और विश्व विजय का प्रतीक होता है। ब्रह्म ध्वजा परंपरा को अमर बनाने के लिए विक्रमादित्य ने मुद्राएं जारी की थी। जोकि आज भी महिदपुर स्थित अश्विनी शोध संस्थान में सुरक्षित हैं।

व्यापार का प्रमुख केंद्र
आपको बता दें कि उस समय उज्जैन अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। उस समय के सिक्कों में बनी आकृतियां बताती है कि उज्जैन पृथ्वी का मध्य बिंदु पर स्थित है। प्राप्त सिक्कों के एक तरफ भगवान शिव सूर्यदंड के साथ और दूसरी तरफ प्लस (+) का निशान बना है। इसके चारो तरफ गोले बने हैं जो दर्शाता है कि उज्जैन जल, थल और आकाश तीनों मार्गों से विश्व से जुड़ा है।

सूर्यनारायण ने 65 वर्षों तक सुरक्षित रखा ध्वज
शोधपीठ के निदेशक राम तिवारी ने बताया कि ब्रह्म ध्वज को पं सूर्यनारायण व्यास ने 65 वर्षों तक अपनी पूजा स्थल पर सुरक्षित रखा था। यही ध्वज की प्रेरणा से वर्तमान ब्रह्म ध्वजा का निर्माण किया गया है। राम तिवारी ने बताया कि विक्रम संवत ज्ञान, संस्कृति विज्ञान और अनुसंधान का महापर्व है।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *