12 March, 2026 (Thursday)

आम लोगों की पसंद बनी अमृत भारत एक्सप्रेस! स्लीपर क्लास में 100% से ज्यादा ऑक्यूपेंसी, रेलवे ने बढ़ाए 860 जनरल कोच

अमृत भारत एक्सप्रेस धीरे-धीरे आम यात्रियों की पहली पसंद बनती जा रही है। खासतौर पर कम किराए में लंबी दूरी का सफर करने वाले यात्रियों के बीच इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक इन ट्रेनों के स्लीपर क्लास में औसत ऑक्यूपेंसी 100 फीसदी से भी ज्यादा दर्ज की गई है।
भारतीय रेलवे की नई ट्रेन अमृत भारत एक्सप्रेस आम यात्रियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कम किराए में बेहतर सुविधाएं देने वाली यह नॉन-एसी ट्रेन खास तौर पर लो और मिडिल इनकम वर्ग के यात्रियों को ध्यान में रखकर शुरू की गई है। रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक इन ट्रेनों के स्लीपर क्लास में औसत ऑक्यूपेंसी 100 फीसदी से ज्यादा दर्ज की गई है, जिससे साफ है कि यात्रियों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
अमृत भारत एक्सप्रेस पूरी तरह नॉन-एसी आधुनिक ट्रेन सेवा है, जिसे लंबी दूरी की यात्रा को सस्ता, सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए शुरू किया गया है। इस ट्रेन में कुल 11 जनरल कोच, 8 स्लीपर कोच, 1 पैंट्री कार और 2 लगेज-कम-दिव्यांग कोच शामिल होते हैं। रेलवे के अनुसार, ये ट्रेनें बेहतर स्पीड और आधुनिक सुरक्षा मानकों के साथ चलाई जा रही हैं।

यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं
अमृत भारत एक्सप्रेस में यात्रियों को कई नई और आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। सीट और बर्थ का डिजाइन बेहतर बनाया गया है, जो वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की तरह आरामदायक एक्सपीरिएंस देता है। इसके अलावा ट्रेनों में झटके रहित सेमी-ऑटोमैटिक कपलर, बेहतर क्रैश सेफ्टी, सीसीटीवी कैमरे, एलईडी लाइट्स और मोबाइल चार्जिंग सॉकेट लगाए गए हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए फायर सप्रेशन सिस्टम, इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम और बेहतर ब्रेकिंग सिस्टम भी लगाया गया है। साथ ही ट्रेन में नॉन-एसी पैंट्री कार और साफ-सुथरे टॉयलेट की व्यवस्था की गई है।

रेलवे ने बढ़ाए जनरल कोच
यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए भारतीय रेलवे ने जनरल कोचों की संख्या भी बढ़ाई है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में लंबी दूरी की ट्रेनों में करीब 1250 जनरल कोच जोड़े गए थे। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 860 जनरल कोचों का स्थायी रूप से इजाफा किया गया है, ताकि बिना रिजर्वेशन यात्रा करने वाले यात्रियों को ज्यादा जगह मिल सके।

17 हजार नॉन-एसी कोच बनाने की योजना
रेलवे ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए 17,000 नॉन-एसी कोच (जनरल और स्लीपर) बनाने की प्लानिंग भी शुरू की है। इससे आम यात्रियों को ज्यादा सीटें और बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

सफाई और रखरखाव पर भी जोर
रेलवे ने ट्रेनों की सफाई और रखरखाव को भी प्रायोरिटी दी है। सभी ट्रेनों में बायो-टॉयलेट लगाए गए हैं, जिससे ट्रेनों और रेलवे ट्रैक की साफ-सफाई बेहतर बनी रहती है। इसके अलावा कोचों की मैकेनाइज्ड क्लीनिंग, ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था भी की गई है।

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