Freebies पर राज्यों को Supreme Court की फटकार, घाटे में चल रहे राज्य फिर भी मुफ्त योजनाएं
सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने सभी राज्यों की राजनीतिक पार्टियों द्वारा मुफ्त योजनाओं के वितरण पर कड़ी आलोचना की है। न्यायालय ने चिंता जताई कि इस तरह की योजनाओं का सार्वजनिक वित्त पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों को मुफ्त योजनाओं के बजाय ऐसी नीतियां बनानी चाहिए, जो लोगों के जीवन स्तर को सुधार सकें, जैसे बेरोजगारी भत्ता योजनाएं।
राज्य घाटे में फिर भी मुफ्त योजनाएं
मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि यह फिजूलखर्ची देश के आर्थिक विकास में रुकावट डाल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य का कर्तव्य है कि वह संसाधन उपलब्ध कराए, लेकिन मुफ्त योजनाओं का लाभ उठाने वालों पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य घाटे में चल रहे हैं, फिर भी मुफ्त योजनाएं दी जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य के राजस्व का 25 प्रतिशत क्यों नहीं राज्य के विकास के लिए इस्तेमाल किया जाता?
किस तरह के खर्चे बेरोजगारी से जूझ रहे…
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह समस्या केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश से संबंधित है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि राज्यों को अपने बजट प्रस्ताव पेश करने चाहिए और यह स्पष्टीकरण देना चाहिए कि किस तरह के खर्चे बेरोजगारी से जूझ रहे लोगों की भलाई के लिए किए जा रहे हैं।
