06 June, 2026 (Saturday)

राष्ट्रपति ट्रंप और राजदूत सर्जियो गोर ने लिखा नया अध्याय, समझौते के पीछे की कहानी

वॉशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार रात भारत के साथ एक बड़े और ऐतिहासिक व्यापारिक समझौते की घोषणा कर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और व्यापारिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने हमेशा की तरह अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बड़े अक्षरों और भारी-भरकम आंकड़ों के साथ इस समझौते की जानकारी साझा की। हालांकि, इस बड़ी खबर का संकेत सोमवार को ही नई दिल्ली में मौजूद उनके सबसे भरोसेमंद सिपहसालार और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दे दिया था। महज 38 वर्षीय सर्जियो गोर ने एक महीने पहले ही कार्यभार संभाला है और वे टैरिफ विवादों के दौर में भारत-अमेरिका संबंधों को नया आकार देने वाले ट्रंप के मुख्य वास्तुकार बनकर उभरे हैं।
सर्जियो गोर की भूमिका इस समझौते में कितनी महत्वपूर्ण रही है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पद संभालने से पहले ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से एक विशेष हस्ताक्षरित तस्वीर भेंट की थी, जिस पर प्रशंसापूर्ण संदेश लिखा था। भले ही हाल के दिनों में राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर कुछ सख्त टिप्पणियां की थीं, लेकिन राजदूत गोर ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक सक्रियता को लेकर हमेशा सकारात्मक रुख अपनाए रखा। उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर मात्र 18 प्रतिशत करने का बड़ा फैसला किया है। इसके बदले में राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, भारत 500 अरब डॉलर का अमेरिकी सामान खरीदेगा और अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ शून्य कर देगा। हालांकि, भारतीय पक्ष ने इस समझौते की पुष्टि तो की है, लेकिन जीरो टैरिफ के दावे पर फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
सर्जियो गोर की जीवन यात्रा किसी अमेरिकन ड्रीम से कम नहीं है। 1986 में तत्कालीन सोवियत संघ (उज्बेकिस्तान) में जन्मे सर्गेई गोरोखोव्स्की, जो अब सर्जियो गोर के नाम से जाने जाते हैं, 90 के दशक के अंत में अमेरिका पहुंचे और वहां की नागरिकता प्राप्त की। रिपब्लिकन हलकों में अपनी पहचान बनाने वाले गोर धीरे-धीरे ट्रंप के इतने करीब आ गए कि उन्हें मेयर ऑफ मार-ए-लागो कहा जाने लगा। उन्होंने ट्रंप परिवार के साथ मिलकर पब्लिशिंग बिजनेस चलाया और प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। उनकी वफादारी और कार्यकुशलता ही थी कि उन्हें भारत जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश में राजदूत बनाकर भेजा गया।
नई दिल्ली में अपनी पारी शुरू करते ही गोर ने दो महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जो आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करेंगी। पहली यह कि राष्ट्रपति ट्रंप अगले एक-दो वर्षों में भारत का दौरा कर सकते हैं, और दूसरी, भारत को पैक्स सिलिका गठबंधन में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। यह गठबंधन विशेष रूप से सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और एआई बुनियादी ढांचे पर केंद्रित है। यह भविष्य की तकनीक पर दोनों देशों की बढ़ती निर्भरता और विश्वास का प्रतीक है।
राजदूत गोर ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की दोस्ती को असीमित संभावनाओं वाला बताया है। जब उनसे समझौते की बारीकियों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही चतुराई से कहा कि वे बारीकियां व्यापार वार्ताकारों पर छोड़ते हैं, लेकिन यह संदेश स्पष्ट है कि अमेरिका व्यापार के लिए पूरी तरह खुला है। गोर का मानना है कि असली दोस्त असहमत हो सकते हैं, लेकिन अंत में वे अपने मतभेदों को सुलझा लेते हैं। इस ऐतिहासिक व्यापारिक समझौते ने न केवल आर्थिक संबंधों को नई ऊर्जा दी है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि सर्जियो गोर के रूप में राष्ट्रपति ट्रंप के पास एक ऐसा मोहरा है जो जटिल कूटनीतिक गुत्थियों को सुलझाने में माहिर है।

 

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