06 June, 2026 (Saturday)

UAE के साथ भारत की एकेडमिक पार्नटरशिप होगी मजबूत, बढ़ेगा टेक्नोलॉजी में सहयोग

यूएई के राष्ट्रपति के दिल्ली दौरे पर भारत और यूएई के बीच शिक्षा, डिजिटल फाइनेंस और टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई है. दोनों देशों ने यूनिवर्सिटीज को जोड़ने, छात्रों के आदान-प्रदान और डिजिटल पेंमेंट सिस्टम्स को एकीकृत करने पर जोर दिया.
UAE के साथ भारत की एकेडमिक पार्नटरशिप होगी मजबूत, बढ़ेगा टेक्नोलॉजी में सहयोग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ हैं
भारत और संयुक्त अरब अमीरात दोनों देश अपने बाइलैटरल रिश्तों को और मज़बूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान 19 जनवरी 2026 को दिल्ली दौरे पर रहे जहां पर दोनों देशों के बीच शिक्षा, डिजिटल फाइनेंस और टेक्नोलॉजी के फील्ड में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है. दोनों देशों के बीच हुई बातचीत में एजुकेशन और फाइनेंस सिस्टम्स को आपस में जोड़ने के साथ-साथ लोगों के लिए इन्हें आसान और सुलभ बनाने पर ज़ोर दिया गया.

भारत और यूएई ने यूनिवर्सिटीज और एकेडमिक इंस्टीट्यूट्स के बीच सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है. यूएई में पहले से चल रहे आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद के ऑफशोर कैंपस इस सहयोग की मजबूत नींव बने हुए हैं. आने वाले समय में स्टूडेंट्स एक्सचेंज प्रोग्राम्स को बढ़ावा दिया जाएगा. जिससे दोनों देशों के छात्रों को एक-दूसरे की शिक्षा प्रणाली और संस्कृति को समझने का मौका मिलेगा. इसे नॉलेज और इनोवेशन का एक मजबूत ब्रिज माना जा रहा है.

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डिजिलॉकर भी जोड़ा जाएगा
इसके अलावा स्कूलों और कॉलेजों में इनोवेशन और टिंकरिंग लैब्स का विस्तार करने का प्लान भी है. ताकि छात्रों में तकनीकी सोच और क्रिएटिविटी को बढ़ावा मिल सके. एक अहम प्रस्ताव यह भी है कि भारत की डिजिलॉकर प्रणाली को यूएई के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए. इससे इंडियन एकेडमिक डिग्रियों और डॉक्यूमेंट्स का वैरिफिकेशन आसानी से हो सकेगा. छात्रों व पेशेवरों को शिक्षा और रोज़गार के मौके पाने में आसानी होगी.

फाइनेंस फील्ड में भी दोनों देशों ने डिजिटल सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है. भारत और यूएई के नेशनल पेमेंट प्लेटफॉर्म को आपस में जोड़ने की योजना बनाई जा रही है. इससे सीमा-पार भुगतान तेज़, सुरक्षित और कम लागत में संभव हो सकेगा. इसका सीधा लाभ व्यापारियों, प्रवासी भारतीयों और आम लोगों को मिलेगा.

तकनीक, ऊर्जा और सांस्कृतिक रिश्ते
शिक्षा और फाइनेंस के अलावा साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर भी चर्चा हुई. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सुपरकंप्यूटिंग और स्पेस जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने की योजना है. एनर्जी सिक्योरिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे स्पेशल इनवेस्टमेंट रीजन्स, स्मार्ट अर्बन टाउनशिप्स और ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी में भी हिस्सेदारी की बात पर फोकस किया गया.

कई और अहम मुद्दों पर हुई चर्चा
सांस्कृतिक रिश्तों और लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करना भी प्राथमिकता में है. युवाओं और शिक्षाविदों के लिए विनिमय कार्यक्रमों के साथ-साथ अबू धाबी में हाउस ऑफ इंडिया की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया है. रक्षा, सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे भी बातचीत का अहम हिस्सा रहे. कुल मिलाकर, यह वार्ता भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और व्यापक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है जो दोनों देशों के लंबे समय में और मज़बूत रिश्तों को नई ऊंचाई देगी.

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