06 June, 2026 (Saturday)

NEET: MBBS सीटों में बंपर बढ़ोतरी…. मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी का संकट, क्या NEET PG क्वालीफाईंग कटऑफ में कमी वाले फार्मूले से निकलेगा समाधान?

NEET: देश में मेडिकल एजुकेशन इंफास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार हो रहा है. इसी अनुपात में MBBS की सीटें बढ़ रही हैं, लेकिन दूसरी तरफ देश में मेडिकल फैकेल्टी का बड़ा संकट है. अब सवाल ये है कि क्या नीट पीजी क्वालीफाईंग कटऑफ में गिरावट से फैकल्टी संकट का समाधान भी हो सकता है.
NEET: MBBS सीटों में बंपर बढ़ोतरी…. मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी का संकट, क्या NEET PG क्वालीफाईंग कटऑफ में कमी वाले फार्मूले से निकलेगा समाधान?
NEET से मेडिकल में एडमिशन
NEET: नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस (NBEMS) ने बीते रोज नेशनल एंट्रेंस कम एलिजिबिलिटी टेस्ट (NEET) PG 2025 क्वालिफाइंग कट-ऑफ में बदलाव किया है. इस बदलाव के तहत NEET PG की नई क्वालीफाइंग कट ऑफ में कमी गई है, जिसके बाद एससी, एसटी और ओबीसी कैंडिडेट्स के लिए कैंडिडेट्स जीरो (0) और जनरल की कटऑफ 7 पर्सेंटाइल हो गई है. इस बदलाव के बाद NEET PG 2025 में माइनस 40 स्कोर हासिल करने वाले कैंडिडेट्स भी मेडिकल की पीजी सीटों में एडमिशन ले सकेंगे. वहीं इस फैसले का देशभर में विरोध शुरू हो गया है.

माना जा रहा है कि MD-MS जैसे पोस्ट ग्रेजुएशन मेडिकल कोर्सों की खाली सीटों को भरने के लिए ये फैसला लिया गया है. वहीं एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि फैकेल्टी की कमी की वजह से MBBS स्टूडेंट्स का एजुकेशन स्तर गिरा है, इस वजह से अधिकांश स्टूडेंट्स NEET PG क्वालीफाई ही नहीं कर पा रहे हैं. साथ-साथ ये भी माना जा रहा है कि ये कदम भविष्य में मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी को भी पूरा करेगा. इस विषय को विस्तार से समझते हैं.

मेडिकल कॉलेज फैकल्टी का नियम क्या है
किसी मेडिकल कॉलेज को निर्धारित फैकल्टी की संख्या के आधार पर ही मान्यता दी जाती है.
20 से अधिक डिपार्टमेंट्स की एक्सपर्ट फैकल्टी होनी चाहिए.
एक प्रोफेसर, 2 एसोसिएट प्रोफेसर और 3 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे हैं नियम
MBBS के बाद पीजी (MS-MD, DNB) करने वाले डाॅक्टर कुछ साल के अनुभव के बाद मेडिकल फैकल्टी के तौर पर हो सकते हैं भर्ती
एक दशक में दोगुने हुए मेडिकल कॉलेज, MBBS की सीटें डबल से ज्यादा
देश में मेडिकल एजुकेशन इंफास्ट्रक्चर तेजी से विस्तार कर रहा है. मसलन, एक दशक में मेडिकल कॉलेज दोगुने हुए हैं तो इसी अनुपात में MBBS की सीटें भी डबल हुई हैं. साल 2013 में देश के अंदर 387 मेडिकल काॅलेज थे, तो वहीं 2025 में देश के अंदर 731 मेडिकल काॅलेज संचालित हाे रहे हैं.

वहीं MBBS सीटों की बात करें तो 2014 में देश के अंदर MBBS की कुल 54352 की सीटें थीं. 2025 में MBBS की 1,28,875 सीटों पर एडमिशन के लिए कांउसलिंग आयोजित की गई. इस तरह एक दशक में MBBS की सीटों में दोगुने से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी संकट पर एक नजर
सफदरजंग मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी के 398 पद स्वीकृत हैं. 2025 में इनमें से 70 पद खाली हैं.
AIIMS में साल 2025 में फैकल्टी के 2500 से ज्यादा पद खाली, 4 सालों में ये संख्या सबसे ज्यादा
दिल्ली के भीमराव अंबेडकर मेडिकल कॉलेज में मेडिकल फैकल्टी के 2025 में 50 फीसदी से अधिक पद खाली.
देशभर में नए खुले अधिकांश मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी के पद खाली हैं.
क्वालिफाइंग कट-ऑफ में कमी क्या फैकल्टी संकट का समाधाान है?
NEET PG 2025 क्वालिफाइंग कट-ऑफ में कमी क्या देश में मेडिकल एजुकेशन फैकल्टी का समाधान है. इस सवाल के जवाब में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन के मुख्य संरक्षक डॉ रोहन कृष्णनन कहते हैं कि फिलहाल इस फैसले को नीट पीजी के खाली सीटों को भरने के फैसले के तौर पर देखना चाहिए. वह कहते हैं कि बेशक फैकल्टी की कमी है और MBBS स्टूडेंट्स को ठीक से पढ़ाया नहीं जा रहा है और नीट यूजी क्वालिफाइंग कट-ऑफ में कमी से एडमिशन लेने वाले भविष्य में फैकल्टी बन सकेंगे, लेकिन इसके लिए अभी लंबा समय है. इसके लिए उन्हें 10 साल के अनुभव की जरूरत भी होगी.

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