05 June, 2026 (Friday)

Kottankulangara Devi Mandir: साड़ी, बिंदी और गहने… इस मंदिर में ‘औरत’ बनकर ही पुरुष टेकते हैं माथा

Kottankulangara Devi Mandir: केरल के कोल्ल्म जिले में स्थित है कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर. यहां देवी की पूजा-अर्चना करने से पहले पुरुष श्रद्धालु महिलाओं की तरह तैयार होते हैं. इस मंदिर में देवी की पूजा से पहले पुरुषों का सोलह श्रृंगार करना अनिवार्य है.
Kottankulangara Devi Mandir: साड़ी, बिंदी और गहने… इस मंदिर में ‘औरत’ बनकर ही पुरुष टेकते हैं माथा
कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर
Kerala Kottankulangara Devi Mandir: भारत मंदिरों का देश कहा जाता है. यहां कई प्राचीन और अनोखे मंदिर हैं. जिनकी अलग-अलग अनोखी परंपराए हैं. केरल के एक मंदिर की चर्चा उसकी एक अनोखी परंपरा के कारण देश के साथ-साथ विदेश में भी होती है. केरल के इस मंदिर का नाम है, कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर. ये मंदिर केरल के कोल्ल्म जिले में स्थित है. यहां देवी की पूजा-अर्चना करने से पहले पुरुष श्रद्धालु महिलाओं की तरह तैयार होते हैं.

इस मंदिर में देवी की पूजा से पहले पुरुषों का सोलह श्रृंगार करना अनिवार्य है. इस मंदिर में पुरुषों द्वारा साड़ी, चूड़ियां, बिंदी और पारंपरिक आभूषण पहनकर देवी भगवति की पूजा की जाती है. यह मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित किया गया है. मंदिर अपनी एक विशेष पंरपरा के लिए मशहूर है, जिसका नाम है चमायाविलक्कू. इस अनुष्ठान में पुरुषों द्वारा महिलाओं का वेश बनाया जाता है.

इसके बाद पुरुष देवी की पूजा-अर्चना करते हैं. देवी से नौकरी, विवाह, स्वास्थ्य व पारिवारिक सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं. यह परंपरा श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है. हिंदू धर्म में हर त्योहार की अपनी विशेष परंपराएं हैं. हर त्योहार परंपराओं के साथ ही मनाया जाता है. चाम्याविलक्कू उत्सव ऐसा ही एक अनोखा त्योहार है. ये त्योहार हर साल 23-24 मार्च को देवी के मंदिर में मनाया जाता है.

इस दौरान हजारों पुरुष महिलाओं की तरह सजते हैं और फिर मंदिर पहुंचते हैं. स्थानीय मान्यता है कि मंदिर में जो देवी की मूर्ति है वो खुद ही प्रकट हुई थी. इस मंदिर के गर्भ गृह में न तो छत है और न ही कलश. ये केरल का इकलौता ऐसा मंदिर है. यहां हर साल देवी की मूर्ति का आकार कुछ इंच बढ़ता है. ऐसा लोगों का विश्वास है.

मंदिर से जुड़ी कथाएं
एक मान्यता के अनुसार, सालों पहले चुछ चरवाहों ने यहां महिलाओं के वेश में एक पत्थर पर फूल अर्पित किए थे. इसके बाद उसमें से एक दिव्य शक्ति का प्राक्ट्य हुआ. दूसरी कथा के अनुसार, पत्थर पर नारियल फोड़ने के बाद उसमें से खून निकलने लगा. इसके बाद लोगों की आस्था बढ़ी पूजा शुरू हुई. इन्हीं धार्मिक मान्यताओं की वजह से इस पंरपरा का निर्वाहन हजारों सालों से किया जा रहा है.

मंदिर परिसर में विशेष मेकअप रूम बने हैं, ताकि पुरुषों को श्रृंगार करने में असुविधा हो. मान्यता है कि जो पुरुष महिला के वेश में पूजा-अर्चना करते हैं, उनकी पूजा से देवी जल्द प्रसन्न होती हैं और सारे मनोरथ पूर्ण करती हैं.

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *