11 March, 2026 (Wednesday)

पाकिस्तान को दिया गच्चा….

……भारत और अफगानिस्तान ने बायपास मार्ग से शुरु कर दिया कारोबार
नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए शुरू की जा रही कार्गो फ्लाइट्स से पाकिस्तान की शाहबाज सरकार को मिर्ची लग सकती है। दरअसल पाकिस्तान द्वारा बार-बार सीमा बंद करने के कारण अफगानिस्तान के व्यापार को हो रहे नुकसान के जवाब में बायपास के तौर पर काम करेंगी। भारत और अफगानिस्तान के बीच सीधे कार्गो फ्लाइट्स (एयर फ्रेट कॉरिडोर) की शुरुआत की जा रही है। पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाना और अफगानिस्तान की पाकिस्तान पर निर्भरता कम करना। यह सहमति अफगान वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री अल-हाज नूरुद्दीन अजीजी की भारत यात्रा के दौरान बनी। काबुल-दिल्ली और काबुल-अमृतसर सेक्टरों पर एयर फ्रेट कॉरिडोर सक्रिय कर दिए गए हैं। भारत की ओर से सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं, और फ्लाइट्स बहुत जल्द शुरू होंगी, अब केवल अफगान अधिकारियों की तरफ से दस्तावेज़ों का काम बाकी है। हाल के सालों में पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच दुश्मनी बढ़ी है, जिसके कारण पाकिस्तान बार-बार बॉर्डर क्रॉसिंग (जैसे तोर्खम और चमन) बंद कर देता है और आवागमन सीमित करता है। सीमा बंद होने से अफगान निर्यात ठप पड़ गया, हजारों व्यापारी फंसे, और किसानों/निर्यातकों को 100 मिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ। इसके अलावा जल्दी खराब होने वाले सामान (फल, मेवे, जड़ी-बूटियाँ) ट्रकों में रुकने से सड़ गए, जिससे कृषि व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ। लेकिन अब कार्गो फ्लाइट्स से अफगान उत्पाद कुछ घंटों में भारत के बाजारों तक पहुँच सकते हैं, जबकि ज़मीनी रास्ते से हफ्तों का समय लगता था।
भारत को लाभ
यह नई हवाई व्यापार व्यवस्था अफगानिस्तान में भारत की आर्थिक उपस्थिति को मजबूत करेगी। यह पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए मध्य एशिया तक एक वैकल्पिक व्यापार मार्ग बनाएगी। यह पहल एयर कॉरिडोर और ईरान के चाबहार पोर्ट के जरिए भारत के क्षेत्रीय व्यापार विस्तार की कोशिशों का हिस्सा है। दोनों देश समर्पित व्यापार दूत नियुक्त करने पर काम कर रहे हैं। वाणिज्य, निवेश और कनेक्टिविटी पर लंबे समय से निष्क्रिय पड़े ज्वॉइंट वर्किंग ग्रुप को पुनर्जीवित करने की योजना है। काबुल-दिल्ली, काबुल-अमृतसर और काबुल-कंधार मार्गों पर एयर कुरियर सेवाएँ शुरू करने पर भी चर्चा चल रही है। (कंधार की उड़ानों के लिए सुरक्षा समीक्षा चल रही है क्योंकि यह 1999 के आईसी-814 हाईजैकिंग घटना से जुड़ा है)।

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