12 March, 2026 (Thursday)

खदान पर गिरा पुल, तांबा निकाल रहे 32 मजदूरों की मौत, मच गया हड़कंप

किशासा,(ईएमएस)। कांगो के लुअलाबा प्रांत के कालांडो खदान पर एक पुल ढह जाने के बाद अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में कुल 32 लोगों की मौत हो गई। यह घटना इस साल कांगो में हुए सबसे भीषण खनन हादसों में से एक है। सरकारी आर्टिसनल माइनिंग एजेंसी के मुताबिक हादसा उस समय हुआ, जब खदान वाले इलाके में अचानक फायरिंग की आवाज सुनाई दी। बता दें कि हादसे से पहले मजदूरों और सैनिकों के बीच झड़प की भी खबरें हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मानवाधिकार संगठन इनीशिएटिव फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट्स ने सैन्य भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की है। कांगो में आर्टिसनल खनन से 15 से 20 लाख लोगों की रोज़ी-रोटी चलती है, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम बेहद कमजोर हैं। अक्सर बिना सुरक्षा उपकरणों के अस्थिर इलाकों में काम करने के कारण ऐसे हादसे आम हो गए हैं। कभी सुरंग ढह जाती है, कभी जमीन धंस जाती है और कभी भीड़भाड़ से भरे पुल और रास्ते टूट जाते हैं।

बताया जा रहा है कि सुरक्षा में तैनात सैन्यकर्मियों की ओर से गोलियां चलने की सूचना पर खदान मजदूरों में घबराहट फैल गई और वे तेजी से एक संकरे पुल की ओर भागने लगे। भागते लोगों का भारी दबाव पड़ने की वजह से पुल अचानक टूट गया और मजदूर नीचे गिर पड़े। एजेंसी ने बताया कि मजदूर एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे, जिससे कई लोगों की मौत और गंभीर चोटें आईं। कुछ अधिकारियों ने शुरुआती अनुमान में 49 मौतों का दावा किया था और 20 से ज्यादा घायल बताए थे, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर 32 मौतों की पुष्टि की है। इससे पहले इसी साल पूर्वी कांगो में एक कोल्टन खदान में छत के ढहने से कम से कम 20 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। यह हादसा अस्थिर स्थिति, स्थानीय सुरक्षा की कमजोरी और असुरक्षित खनन परिस्थितियों की वजह से हुआ।2022 में कासाई प्रांत में हीरे की खदान में सुरंग ढहने से 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। यह भी एक गैर-नियमित खनन गतिविधि का हिस्सा था, जहां सुरक्षा मानकों की कमी थी। 2019 में लुअलाबा प्रांत की खदान में, ग्लेनकोर संचालित खदान के पास लगभग 43 खनिक मारे गए थे जब खदान की एक दीवार गिर गई थी। यह घटना भी असर्टिसनल और कॉर्पोरेट खान चलाने वालों के बीच छिपे विवाद को उजागर करती है।

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