Akshay Navami Vs Akshay Tritiya: अक्षय नवमी और अक्षय तृतीया में क्या अंतर है? 5 प्वाइंट्स से समझिए
अक्षय तृतीया और अक्षय नवमी को लोग अक्सर एक ही समझ लेते हैं. लेकिन ये दोनों पर्व एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं. इस लेख में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि अक्षय नवमी और अक्षय तृतीया में क्या अंतर है, साथ ही जानेंगे इन दोनों का महत्व.
Akshaya Tritiya and Akshay Navami: हिंदू धर्म शास्त्रों अक्षय तृतीया का वही महत्व बताया गया है, जो अक्षय नवमी का बताया गया है. इन दोनों पर्व का महत्व एक जैसा होने के बावजूद भी ये एक-दूसरे से काफी अलग हैं. अक्षय तृतीया और अक्षय नवमी, दोनों को ही धार्मिक दृष्टि से बेहद शुभ और पुण्यदायी माना गया है. हालांकि, कुछ मान्यताएं और विधान ऐसे हैं, जो इन दोनों त्योहारों को एक दूसरे से अलग बनाते हैं. चलिए आपको बताते हैं अक्षय नवमी और अक्षय तृतीया में क्या अंतर होता है.
अक्षय नवमी क्या है
अक्षय नवमी को आंवला नवमी भी कहते हैं. यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है. इस दिन भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है, क्योंकि मान्यता है कि इस दिन आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु निवास करते हैं. अक्षय नवमी पर किए गए धार्मिक कार्यों से अक्षय (कभी समाप्त न होने वाला) पुण्य मिलता है, इसलिए इसे अक्षय नवमी कहा जाता है.
अक्षय तृतीया क्या है?
अक्षय तृतीया हिंदू और जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है. यह वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. “अक्षय” का अर्थ है “कभी खत्म न होने वाला,”. कहते हैं कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल हमेशा मिलता है. यह त्योहार सोना खरीदने, दान-पुण्य करने और नए कारोबार को शुरू करने के लिए बहुत शुभ माना जाता है.
अंतर अक्षय नवमी अक्षय तृतीया
तिथि कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी तिथि वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि
पूजा भगवान विष्णु, आंवले के पेड़ की पूजा भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी की पूजा
महत्व इस दिन से सतयुग की शुरुआत इस दिन से त्रेतायुग की शुरुआत
मान्यताएं दान-पुण्य का विशेष महत्व खरादारी करने का विशेष महत्व
अन्य नाम आंवला नवमी आखा तीज
सत्य युगादि भी कहते हैं त्रेता युगादि भी कहते हैं
