07 June, 2026 (Sunday)

खेती से होने वाली आय पर टैक्स नहीं लगने से अमीर किसान और बड़ी कंपनियां उठा रही फायदा

देश में कृषि से होने वाली आय पर टैक्स नहीं लगता। देश के गरीब किसानों की बात तो समझ में आती है, लेकिन यह समझ से परे है कि अमीर किसानों की आय पर टैक्स क्यों नहीं लगाया जाता है? अगर यह कहा जाए कि 130 करोड़ की आबादी वाला यह देश सिर्फ साढ़े चार करोड़ लोगों के आयकर के पैसों से चलता है, तो हैरान न हों। इसमें भी डेढ़ करोड़ करदाता ऐसे हैं, जिनका योगदान नाम भर का है। यानी व्यावहारिक तौर पर देश की कुल आबादी के तीन प्रतिशत से भी कम लोग आयकर देते हैं। अमीर किसान कर देने के बजाय सरकार से ही वसूली कर रहे हैं, चाहे वह न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी में बढ़ोतरी हो या उर्वरकों की कीमतों में सब्सिडी या फिर कम दाम पर या मुफ्त में बिजली।

वर्ष 2017 में तत्कालीन नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबराय ने सुझाव दिया था कि एक सीमा के बाद कृषि से होने वाली आय पर भी कर लगाया जाना चाहिए। पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने भी देबराय की बातों से सहमति जताई थी। कर प्रशासन सुधार आयोग ने साल 2014 में ही कहा था कि दूसरे पेशे के लोग कृषि आय के नाम पर टैक्स छूट की रकम हर साल बढ़ा रहे हैं।

यह वास्तव में टैक्स छूट पाने का एक जरिया बन गया है। सीएजी (कैग) की रिपोर्ट में भी इस बात पर चिंता जताई गई है। कर प्रशासन सुधार आयोग ने सुझाव दिया था कि जिन किसानों की कृषि आय 50 लाख रुपये से अधिक हो, उनसे आयकर लिया जाना चाहिए। जिन किसानों के पास चार हेक्टेयर से अधिक जमीन है, देश में उनकी आबादी कुल किसानों का सिर्फ चार फीसद है, लेकिन उनकी कुल कृषि आय किसानों की कुल आमदनी का 20 फीसद है। हालांकि देश की आजादी के बाद पहली बार साल 1972 में बनाई गई केएन राज समिति ने कृषि पर टैक्स की सिफारिश नहीं की थी। यहां तक कि केलकर समिति ने भी 2002 में कहा था कि देश में 95 फीसद किसानों की इतनी कमाई नहीं होती कि वे टैक्स के दायरे में आएं।

इसका मतलब साफ है कि पांच फीसद किसानों को टैक्स के दायरे में लाया जा सकता है। टैक्स से छूट के दायरे में खेतिहर जमीन से मिलने वाला किराया, फसल बेचने से होने वाली कमाई, नर्सरी में उगाए जाने वाले पौधे से होने वाली आय, कुछ शर्तो के साथ फार्महाउस से होने वाली कमाई इत्यादि आती हैं। खेती से होने वाली आय पर टैक्स नहीं लगने से इसका फायदा उन बड़े किसानों को पहुंच रहा है, जो संपन्न हैं या फिर उन बड़ी कंपनियों को, जो इस सेक्टर में लगी हैं।

 

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