21 October, 2026 (Wednesday)

योगी आदित्यनाथ वर्ष 2017 के चुनाव के बाद पहली बार कैसे बने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री? पढ़िये यह रोचक कहानी

18 वर्ष की उम्र में घर छोड़ देने वाले ऐतिहासिक ‘गोरक्षापीठ’ के महंत योगी आदित्यनाथ लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश की कमान संभालने जा रहे हैं। 37 वर्ष पुराना मिथक तोड़कर इतिहास रचने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा सरकार का दूसरा शपथ ग्रहण समारोह 25 मार्च को होगा। लखनऊ स्थित अटल बिहारी वाजपेयी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट इकाना स्टेडियम में शाम चार बजे से भव्य समारोह आयोजित किया जाएगा। आइये जानते हैं पहली बार 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने की कहानी-

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 के परिणाम जिस दिन आने वाले थे उसी के आसपास योगी आदित्यनाथ को विदेश दौरे पर जाना था। हालांकि एन मौके पर उनके पासपोर्ट को प्रधानमंत्री कार्यालय ने वापस कर दिया और योगी आदित्यनाथ से कहा गया कि चुनाव के परिणाम आने हैं, ऐसे में आपका यहां रहना जरूरी है। इसी के बाद यह लगने लगा कि गोरखपुर से पांच बार सांसद रहे योगी आदित्यनाथ को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।

योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के प्रचार में पूरा दमखम लगाया था, लेकिन मुख्यमंत्री की रेस में वह कहीं भी नहीं थे। उत्तर प्रदेश चुनाव के नतीजे आए तो भाजपा ने एकतरफा प्रचंड बहुमत हासिल किया, लेकिन पार्टी के समक्ष बड़ी समस्या खड़ी हो गई कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री किसे बनाया जाए।

प्रदेश की की राजनीतिक फिजा में मुख्यमंत्री की रेस में कई बड़े नाम चल रहे थे। तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी मुख्यमंत्री की रेस में थे। हालांकि उनकी ओर से लगातार इस बात को खारिज किया जा रहा था। मुख्यमंत्री की रेस में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य का भी नाम था जो बड़े ओबीसी नेता के तौर पर अपनी पहचान बना चुके हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबसे करीबी नेताओं में मनोज सिन्हा भी मुख्यमंत्री की रेस में थे। बताया तो यह भी जाता है कि उनके मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए तैयारियां भी शुरू कर दी थी। इन सब कयासों के बीच 17 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री पद को लेकर दिल्ली में आलाकमान सक्रिय हो गया। उस वक्त योगी आदित्यनाथ गोरखपुर लौट चुके थे। अचानक योगी आदित्यनाथ को दिल्ली से फोन किया गया और उन्हें बुलाया जाता है।

योगी आदित्यनाथ के लिए बकायदा चार्टर्ड प्लेन भेजा गया और दिल्ली बुला लिया गया। दिल्ली आने के बाद योगी आदित्यनाथ को निर्देश दिया जाता है कि आपको उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेनी है और आपको तुरंत लखनऊ जाना है। लखनऊ में योगी आदित्यनाथ को नेता विधायक दल चुना जाता है और 19 मार्च को शपथ ग्रहण भी होता है।

उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व के फायर ब्रांड नेता के तौर पर अपनी पहचान बना चुके योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद कहीं से भी नहीं थी। कई राजनीतिक विश्लेषक तो यह भी कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने हिंदुत्व की राजनीति को जिंदा तो रखा तो वही उत्तर प्रदेश में जाति की राजनीति को भी कम करने की कोशिश की।

वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव में भाजपा योगी आदित्यनाथ के ही चेहरे पर उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ा और इतिहास रच दिया। योगी आदित्यनाथ को भाजपा ने गोरखपुर शहर से उम्मीदवार बनाया। वहां से वह भारी मतों से विजयी हुए। अब वह दोबारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रूप में शपथ लेने जा रहे हैं।

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