एकादशी आज है या कल? जानिए पापांकुशा एकादशी की सही डेट और मुहूर्त
पापांकुशा एकादशी आश्विन शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को पड़ती है। ऐसी मान्यता है इस एकादशी व्रत को करने से सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जानिए इस साल यह एकादशी कब पड़ रही है।
सनातन धर्म में पापांकुशा एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं जो भी श्रद्धालु इस व्रत को करता है उसे हजार अश्वमेघ और सौ सूर्य यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को इस एकादशी व्रत का महत्व बताते हुए कहा था कि यह एकादशी पापों पर अंकुश लगाती है। इस दिन मौन रहकर भगवद् स्मरण और भजन-कीर्तन करने का विधान है। इस एकादशी पर उपवास, दान, जप और भक्ति का विशेष महत्व माना गया है। चलिए जानते हैं इस साल ये एकादशी कब है और इसका शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
पापांकुशा एकादशी कब है 2026
पापांकुशा एकादशी – 22 अक्टूबर 2026, बृहस्पतिवार
एकादशी तिथि प्रारम्भ – 21 अक्टूबर 2026 को 02:11 PM बजे
एकादशी तिथि समाप्त – 22 अक्टूबर 2026 को 02:47 PM बजे
23 अक्टूबर को पारण का समय – 06:27 AM से 08:42 AM
पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय – 02:35 PM
पापांकुशा एकादशी शुभ मुहूर्त 2026
ब्रह्म मुहूर्त – 04:45 AM से 05:35 AM
प्रातः सन्ध्या – 05:10 AM से 06:26 AM
अभिजित मुहूर्त – 11:43 AM से 12:28 PM
विजय मुहूर्त – 01:58 PM से 02:44 PM
गोधूलि मुहूर्त – 05:45 PM से 06:10 PM
सायाह्न सन्ध्या – 05:45 PM से 07:01 PM
अमृत काल – 01:18 PM से 02:58 PM
निशिता मुहूर्त – 11:40 पी एम से 12:31 AM, अक्टूबर 23
पापांकुशा एकादशी व्रत पूजा विधि
एकादशी तिथि पर प्रात:काल उठकर स्नान आदि के बाद व्रत का संकल्प लें।
इसके बाद घट स्थापना करें और कलश पर भगवान विष्णु की मूर्ति रखकर विधि विधान पूजा करें।
भगवान विष्णु को तुलसी दल जरूर अर्पित करें।
इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
पापांकुशा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
अंत में विष्णु भगवान की आरती करके उन्हें भोग अर्पित करें।
फिर व्रत के अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन और अन्न का दान करने के बाद व्रत खोलें।
पापांकुशा एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस एकादशी के बारे में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि यह एकादशी पाप का निरोध करती है अर्थात पाप कर्मों से रक्षा करती है। इस व्रत को करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
