इमरान खान के सहयोगी ने कहा- चीन ने CPEC के दूसरे चरण के तेजी से विकास का दिया आश्वासन
पाकिस्तान और चीन की दोस्ती दिन-प्रतिदिन गहराती जा रही है। पाकिस्तान के चीन के साथ संबंध विदेश नीति की एक महत्वपूर्ण आधारशिला है। बीते शुक्रवार को पाकिस्तान ने 60 अरब डालर के चीन-पाकिस्तान इकनोमिक कोरिडोर (CPEC) के दूसरे चरण को शुरू करने के लिए, चीन के साथ एक नए समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने खुद यह माना है कि उनके देश की विदेश नीति पूरी तरह से बीजिंग पर निर्भर करती है। आपको बता दें कि दोनों देश एक दूसरे के मूल हितों से संबंधित हर मुद्दों पर अपना-अपना समर्थन दे रहे हैं।
चीन -पाकिस्तान इकनोमिक कोरिडोर (CPEC)
चीन-पाकिस्तान इकनोमिक कोरिडोर (CPEC) मुख्य रूप से निर्माण कार्यों का एक समूह है, जो चीन पाकिस्तान में कर रहा है। बता दें कि सीपीईसी का पूरा खर्चा चीन उठा रहा है। इस योजना की कुल लागत लगभग 60 अरब डालर है। चीन ने CPEC के दूसरे चरण के तेजी से विकास का आश्वासन दिया है। चीन नें चीन-पाकिस्तान इकनोमिक कोरिडोर (CPEC) योजना की पहली बार 2013 में घोषणा की थी। चीन इस योजना के तहत मुख्य रूप से निर्माण कार्य जैसे रोड, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे आदि बना रहा है। चीन का कहना है कि CPEC योजना से पाकिस्तान एक विकसित देश बनने की ओर अग्रसित हो सकेगा।
प्रधान मंत्री के विशेष सहायक खालिद मंसूर ने कहा
CPEC मामलों पर पाकिस्तान के प्रधान मंत्री के विशेष सहायक खालिद मंसूर ने कहा इमरान खान की 4 दिवसीय बीजिंग यात्रा के दौरान चीन ने CPEC के दूसरे चरण के तेजी से विकास का आश्वासन दिया है। आपको बता दें कि खालिद मंसूर का यह बयान पाकिस्तान और चीन द्वारा शुक्रवार को बीजिंग की बहु-अरब सीपीईसी परियोजना के तहत औद्योगिक सहयोग पर रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद सामने आया है। सोमवार को इस्लामाबाद में एक संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए, मंसूर ने कहा कि इमरान खान के साथ बैठकों के दौरान चीनी कंपनियों के नेतृत्व ने चीनी निवेशकों को पाकिस्तान द्वारा प्रदान किए जा रहे पर्यावरण और सुविधा की सराहना की है।
इसके अलावा, बैठक के बाद एक संयुक्त बयान में कहा गया, ‘दोनों देशों के नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिति और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य पर विचारों का गहन आदान-प्रदान किया।’
एशियाई विकास बैंक (ADB)
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने ढांचागत सुधारों की जरूरत पर जोर देते हुए पिछले हफ्ते कहा था कि अगर 60 अरब डालर के सीपीईसी को सफलतापूर्वक लागू किया जाता है तो पाकिस्तान अपनी आर्थिक कनेक्टिविटी में सुधार कर सकता है। यह योजना पाकिस्तान की आर्थिक मजबूती के लिए काफी जरूरी है।
एडीबी ने एक रिपोर्ट में कहा था, ‘सीपीईसी पीआरसी और पाकिस्तान के बीच आर्थिक संपर्क और क्षेत्रीय एकीकरण के निर्माण की एक पहल है। हालांकि, सीपीईसी अकेले व्यापक परिणाम नहीं लाएगा। निजी क्षेत्र के विकास के लिए संरचनात्मक सुधारों की भी जरूरत है।’
