क्या कांग्रेस के टेस्टिंग किट हैं दिग्गी राजा, जो अपनी धुन में रमे रहकर अक्सर विवादों को देते जन्म
भोपाल। बदनाम हुए तो क्या हुआ नाम तो हुआ। यह कहावत मध्य प्रदेश के दिग्गी राजा अर्थात पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह पर सटीक बैठती है। वह ऐसे शख्स हैं जो अपनी धुन में रमे रहकर अक्सर विवादों को जन्म देते हैं। भले ही वह धुन देश की आवाज के खिलाफ ही क्यों न हो। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक दिग्विजय सिंह को गांधी परिवार खासकर राहुल गांधी का करीबी माना जाता है।
गाहे-बगाहे उनके राहुल के राजनीतिक गुरु होने की चर्चा भी होती है। वह कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य भी हैं। ऐसा वरिष्ठ नेता कोई भी बात अनायास बोलेगा, इसकी कल्पना नहीं की जा सकती। वह भी दिग्विजय जैसे नेता से तो बिल्कुल ही नहीं। कई बार तो उनके विवादित बयानों ने न केवल उन्हें आलोचना का केंद्र बनाया, बल्कि कांग्रेस को भी कठघरे में खड़ा किया। इसके बावजूद यदि दिग्विजय देश की भावना के खिलाफ कोई टिप्पणी करते हैं तो इसे अनायास नहीं कहेंगे। निश्चित ही इसमें भी सोची समझी रणनीति होती है। कांग्रेस इससे अलग हो, यह सोचना भी उचित नहीं होगा। अर्से बाद दिग्विजय ने पाकिस्तान के एक पत्रकार से बातचीत में कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध किया। यह भी कह डाला कि कांग्रेस सत्ता में आई तो वह इस निर्णय पर पुनर्विचार करेगी और 370 बहाल करेगी। उनके इस बयान ने देशवासियों को एक बार फिर दुखी और निराश किया है। इससे देश की राजनीति गरमाई हुई है। मध्य प्रदेश में तो उनके खिलाफ बयानों एवं प्रदर्शनों की बाढ़ आ गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या वास्तव में दिग्विजय ने यह बयान निजी हैसियत से दिया है? या सिर्फ जुबान फिसलने या अंग्रेजी भाषा के शब्द को न समझने का फेर है? क्या देश के एक सांसद से ऐसी अपेक्षा की जा सकती है कि वह किसी पाकिस्तानी पत्रकार से बात करते हुए देश की भावना के खिलाफ निजी राय जाहिर करे?
