पंजाब की एक बेटी की छोटे से जीवन की दर्द भरी कहानी, अंत में लिखा… बच्चे पाल नहीं सकते तो पैदा भी न करें
मोगा । एसबीआरएस गुरुकुल स्कूल की सुसाइड करने वाली 11वीं कक्षा की छात्रा खुशप्रीत कौर ने अपने सुसाइड नोट में ये तो साफ कर दिया है कि वह स्कूल के शारीरिक शिक्षा विभाग के अध्यापक व उसके अनैतिक कामों में साथ दे रही स्कूल प्रिंसिपल की बेटी की वजह से सुसाइड कर रही है। साथ ही सुसाइड नोट में जो कमेंट खुशप्रीत कौर ने किया उसने बच्चों के भविष्य की परवाह किए बिना तलाक लेने वाले मां-बाप पर बड़ा सवाल खड़ा किया है।
खुशप्रीत कौर ने सुसाइड नोट में लिखा है ‘बच्चे पाल नहीं सकते हैं तो पैदा भी न करें मां-बाप।’ दो साल की उम्र से नाना-नानी के पास रह रही खुशप्रीत को जब तक पिता शब्द समझ में आया तब तक पिता का प्यार उससे बहुत दूर जा चुका था। जन्म के बाद से कभी पिता ने अपनी बेटी से मिलने तक की कोशिश नहीं की। हालांकि उसकी मां खुशप्रीत पर प्यार लुटाने की कोशिश करती थी, लेकिन वह कभी मां के करीब नहीं आ सकी।
नाना ने कई बार उसे मां के पास छोड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह वापस नाना के पास आ जाती थी। मृतका के नाना जसवीर सिंह ने बताया कि उसकी बेटी किरणदीप कौर की शादी 18 साल पहले जिला मानसा के गांव आकावाली में रहने वाले गुरप्रीत सिंह से हुई थी। शादी के बाद किरणदीप कौर ने बेटी खुशप्रीत कौर को जन्म दिया। बेटी के जन्म के करीब डेढ़ साल बाद ही तलाक हो गया था।
तलाक के कुछ समय बाद किरणदीप कौर ने लुधियाना के गांव कलार निवासी गुरदीप के साथ शादी कर ली और वह कनाडा में बस गई। दो साल की उम्र से ही खुशप्रीत कौर अपने नाना-नानी के पास रहने लगी थी, परिवार में 70 साल के नाना, नानी व खुशप्रीत कौर थे। नाना खुशप्रीत कौर की पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर थे, इसी कारण वे गांव से शहर में शिफ्ट हो गए थे। उन्होंने खुद मां-बांप की कमी महसूस नहीं होने दी। नाना जसवीर सिंह बताते हैं कि वह लोगों से कहती भी थी कि मां-बाप क्या होते हैं, उनके नाना-नानी से कोई सीखे।
क्या कहती हैं मनो चिकित्सक मनोचिकित्सक
डा.राधिका सेठ का कहना कि बच्चे के सबसे करीब पेरेंट्स होते हैं। ब्लैकमे¨लग के कारण जब उसने सुसाइड का फैसला लिया तो उसके मन में मां-बाप के अभाव का दर्द फूट पड़ा था, अगर पेरेंट्स होते तो शायद वह ब्लैकमेलिंग के सदमे से बाहर आ जाती।
