जानें- किस अपराध के तहत यूरोप में चार दशकों में पहली बार मिली किसी ईरानी राजनयिक को सजा
41 वर्षों में पहली बार ईरान के किसी राजनयिक को आतंकी गतिविधियों और इस षड़यंत्र में शामिल होने का दोषी मानते हुए 20 वर्षों की सजा सुनाई है। वर्ष 1979 में ईरान में हुई क्रांति के बाद ये पहला मौका है। बेल्जियम की कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ईरानी राजनयिक असदुल्लाह असादी को जून 2018 में पेरिस के समीप हुई नेशनल कांउसिल ऑफ रेजिस्टेंश ऑफ ईरान की रैली में बम धमाके का षड़यंत्र रचने का दोषी पाया। सुरक्षाकर्मियों ने इस आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया था।वियना स्थित ईरानी दूतावास से इस मामले में असादी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसको ट्रायल के लिए बेल्जियम भेज दिया गया था।
फ्रांसिसी अधिकारियों के मुताबिक असादी ईरानियन स्टेट इंटेलिजेंस नेटवर्क चलाता था। उसको तेहरान से आदेश दिया जाता था। रॉयटर्स के मुताबिक सुनवाई के दौरान वो खुद कोर्ट में मौजूद नहीं था। ये सुनवाई कड़ी सुरक्षा के बीच बंद दरवाजे के अंदर हुई थी। कोर्ट के फैसले के बाद न तो असादी ने और न ही उसके वकील ने कोई सजा पर कोई टिप्पणी की। रॉयटर्स को मिले पुलिस के दस्तावेजों के के मुताबिक मार्च में असादी ने ऑथरिटीज को कहा था कि यदि उसको दोषी करार देते हुए सजा सुनाइ गई तो मुमकिन है कि आतंकी ग्रुप इसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दे सकते हैं। फैसला सुनाए जाने के दौरान कोर्ट में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। इसके तहत सड़कों पर हथियार बंद सैनिक समेत बख्तरबंद गाडि़यां खड़ी थीं और एक हेलीकॉप्टर आसमान से सुरक्षा का जायजा ले रहा था।
कोर्ट का फैसला आने के बाद ईरानी टीवी पर वहां के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद खतीबजेदाह ने कोर्ट के फैसले को दुर्भाग्यूपर्ण बताया है। उन्होंने कहा है कि कुछ यूरोपीय देश आतंकवाद को लेकर जो वातावरण बन गया है उसके प्रभाव में हैं। इसी वजह से इस तरह का फैसला आया है। उन्होंने इसको गलत और गैरकानूनी बताया है। उन्होंने कहा है कि वो अपने देश के राजनयिक के अधिकारों को लेकर चौकस हैं। प्रोसिक्यूशन के वकील जॉर्ज हैनरी ने कहा कि कोर्ट ने फैसला देते समय दो बातों का ध्यान रखा था। इनमें से पहला था कि आपराधिक मामलों में किसी भी राजनयिक को इम्यूनिटी का अधिकार हासिल नहीं होता है। दूसरा ये कि इस षड़यंत्र के सफल हो जाने पर जो नरसंहार होता उसमें ईरान की जिम्मेदारी। बेल्जियम के फ्रेड्रल प्रोसिक्यूटर के मुताबिक असादी खुद अपने साथ एक्सप्लोसिव लेकर गया था। जिन रैली में धमाका करना था उसमें अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी स्पीच देने वाले थे और इसमें कई देशों के राजूदत हिस्सा ले रहे थे।
वाशिंगटन डीसी स्थित फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसी के विशेषज्ञ टॉबी डेरशोविच का कहना है कि कोर्ट का ये फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के संबंध बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। नए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ईरान से प्रतिबंधों को हटाने या इसमें ढिलाई देने पर विचार कर रहे हैं। साथ ही इस बात पर भी विचार जारी है कि वर्ष 2015 में बराक ओबामा प्रशासन में ईरान से की गई परमाणु संधि को दोबारा जीवनदान दिया जाए। इसमें यूरोप के कुछ देश शामिल थे। आपको यहां पर ये भी बता दें कि यूरोपीय संघ ने ईरान के कुछ लोगों पर प्रतिबंध भी लगाया हुआ है।
इन सभी के बीच ब्रेसेल्स का मानना है कि आतंकवाद से आंख नहीं चुराई जा सकती है। वो भी तब जब दो लोगों की नीदरलैंड में हुई हत्या और डेनमार्क में हत्या की साजिश रचने में शक की सूईं ईरान की तरफ ही उठी है। इसी मामले में तीन और ईरानियों को कोर्ट ने 15, 17 और 18 वर्ष की सजा सुनाई है। इन तीनों के वकीलों का कहना है कि वो हायर कोर्ट में सजा के खिलाफ अपील दायर करेंगे। एनसीआरआई की प्रमुख मरयम रजावी ने रॉयटर्स से बातचीत में बताया कि इस फैसले से साबित होता है कि ईरान प्रायोजित आतंकवाद में लिप्त है।
