महाठग सुकेश चंद्रशेखर को सुप्रीम कोर्ट से झटका, जज बनकर न्यायिक अधिकारी पर बनाया था दबाव, याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने ठग सुकेश चंद्रशेखर की याचिका को खारिज करते हुए उसे बड़ा झटका दिया है। सुकेश को जज बनकर फोन करने और न्यायिक अधिकारी पर दबाव बनाने के मामले में दोषी ठहराया गया था। उसने कोर्ट से सजा पर रोक लगाने की मांग की थी।
जज बनकर फोन करने और न्यायिक अधिकारी पर दबाव बनाने के मामले में दोषी सुकेश चंद्रशेखर को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने ठग सुकेश चंद्रशेखर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपनी सजा और दोषी ठहराए जाने के फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी। कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में कोई गलती नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सुकेश के खिलाफ चल रहे दूसरे मामलों की सुनवाई कानून के मुताबिक और उनके अपने तथ्यों के आधार पर जारी रहनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, ये पूरा मामला साल 2017 के एक भ्रष्टाचार केस से जुड़ा है। आरोप के मुताबिक, पुलिस हिरासत में रहते हुए सुकेश ने एक कांस्टेबल का मोबाइल फोन हासिल किया। इसके बाद उसने पहले सुप्रीम कोर्ट के एक जज के निजी सचिव और फिर खुद जज बनकर संबंधित न्यायिक अधिकारी से संपर्क किया। आरोप था कि उसने अपने मामले में राहत और जमानत हासिल करने के लिए न्यायिक अधिकारी पर दबाव बनाने की कोशिश की।
इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 20 अगस्त को सुकेश को दोषी ठहराया था। इसके बाद 29 अगस्त को उसे सजा सुनाई गई। सुकेश को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 170, 189 और 507 के तहत दोषी ठहराया गया। ये धाराएं सरकारी अधिकारी का रूप धारण करने, सरकारी अधिकारी को चोट पहुंचाने की धमकी देने और गुमनाम तरीके से आपराधिक धमकी देने से जुड़ी हैं। आपको बता दें कि इससे पहले सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े जबरन वसूली के मामले में नोरा फतेही के पेश नहीं होने पर राऊज एवेन्यू कोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा है कि अदालत को हल्के में नहीं ले सकते।
सेशन कोर्ट और हाईकोर्ट से लगा था झटका
सुकेश ने अपनी सजा पर रोक लगाने के लिए पहले सेशन कोर्ट और फिर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। दोनों अदालतों ने उसकी मांग खारिज कर दी। उसकी ओर से पेश वरिष्ठ वकील शोएब आलम ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सुकेश के खिलाफ पहले से दर्ज 31 आपराधिक मामलों का जिक्र करते हुए कड़ी टिप्पणियां की थीं, जबकि उन मामलों में उसे दोषी नहीं ठहराया गया है। वकील की दलील थी कि इन टिप्पणियों का असर दूसरे मामलों की सुनवाई पर पड़ सकता है। इससे सुकेश के खिलाफ चल रहे मुकदमों में उसे नुकसान हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में ऐसी कोई गलती नहीं है, जिसके आधार पर हस्तक्षेप किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि सुकेश के खिलाफ बाकी मुकदमों की सुनवाई अपने-अपने तथ्यों और कानून के आधार पर आगे बढ़नी चाहिए।
