तेरहवीं के एक दिन बाद घर लौटा बेटा, जिंदा देख लिपटकर रोने लगी मां; परिजनों ने आखिर किस शव था अंतिम संस्कार?
यूपी के गाजियाबाद में जिस युवक को मरा समझकर अंतिम संस्कार कर दिया गया था। वह तेरहवीं के अगले दिन जिंदा घर लौट आया। परिजनों ने 14 जून को अंत्येष्टि की थी और 24 जून को तेरहवीं की थी।
गाजियाबाद के कौशांबी थाना क्षेत्र के वैशाली में बृहस्पतिवार को चौंकाने वाला मामला सामने आया। 11 दिन पहले जिस गिरधर सिंह बिष्ट की हत्या का आरोप लगाकर परिजनों ने मसूरी के नाहल झाल में मिले शव का अंतिम संस्कार कर दिया था, वह अचानक घर पहुंच गया। इससे मातम वाले घर का माहौल बदल गया। गमगीन परिजन चौंक गए, पड़ोसी दंग तो पुलिस भी सन्न रह गई।
इस मामले ने अब पुलिस और परिवार दोनों को असमंजस में डाल दिया है। पुलिस के पूछने पर गिरधर ने बताया कि पिछले 13 दिन वह पंजाब के डेरा सच्चा सौदा आश्रम में रहा। इस बीच गिरधर की हत्या के आरोप में जिन सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है, उन्होंने उसके परिवार पर साजिशन झूठा मामला दर्ज कराने का आरोप लगाया है। गिरधर के जीवित होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह आखिर किसका था?
जानिए क्या था पूरा मामला
वैशाली सेक्टर-पांच स्थित कल्पना अपार्टमेंट निवासी गिरधर को इसी वर्ष 17 मई को मारपीट के मामले में कौशांबी थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार किया और अदालत ने उसको जेल भेज दिया था। 21 मई को एसीपी शालीमार गार्डन की कोर्ट से रिहाई का परवाना भेजे जाने के बाद गिरधर जेल से रिहा हो गया, लेकिन घर नहीं लौटा। परिजनों ने मसूरी थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। गिरधर के गायब होने पर परिजनों ने कौशाम्बी थाने पर जमकर हंगामा किया और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।
घर में अपनी तस्वीर पर पुष्पमाला देखकर भड़का युवक
12 जून को मसूरी क्षेत्र की नाहल झाल में एक अज्ञात शव मिला, जिसकी पहचान परिजनों ने कपड़ों और शरीर पर मौजूद निशानों के आधार पर गिरधर के रूप में की थी। इसके बाद 14 जून को शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया और 24 जून को तेरहवीं भी संपन्न हो गई। इसके अगले दिन 25 जून की सुबह करीब 9 बजे गिरधर ऑटो रिक्शा से अपने घर पहुंच गया। वह जैसे ही सोसायटी में दाखिल हुआ, परिजन और स्थानीय लोग हैरान रह गए। घर में अपनी तस्वीर पर पुष्पमाला देखकर वह भड़क उठा।
पुलिस ने की पूछताछ
स्थानीय लोगों की सूचना पर कौशांबी थाना पुलिस घर पहुंची तो गिरधर की मां व बहन घर से बाहर चली गईं। गिरधर ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। काफी देर समझाने के बाद वह बाहर निकला। पुलिस ने पूछताछ की तो गिरधर ने बताया कि जेल से छूटने के बाद लोगों से रुपये मांगकर पंजाब चला गया था। वहां डेरा सच्चा सौदा आश्रम में रहा।
12 जून को मिला था शव
मसूरी पुलिस के अनुसार, 12 जून को मिले शव का चेहरा फूल जाने के कारण पहचान में नहीं आ रहा था। गिरधर के परिजनों ने कपड़े और पुरानी चोट के निशान का हवाला देते हुए शिनाख्त कर दी। पुलिस ने कई बार टोका भी, लेकिन परिजन लगातार शव को गिरधर का ही बताते रहे। मसूरी पुलिस का कहना है कि शव की फर्जी पहचान और हत्या का झूठा मामला दर्ज कराने के आरोप में भी कार्रवाई की जाएगी।
गिरधर की हत्या के आरोप में उसकी मां ने सोसायटी के पास ऑटोमोबाइल की दुकान संचालित करने वाले शैलेश, सुनील, धर्मेंद्र, सोसायटी निवासी रविंद्र त्यागी व अंडा बिक्री करने वाली नैना समेत सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। ऑटोमोबाइल शॉप पर मारपीट कर्मेंके आरोप में ही कौशांबी पुलिस ने गिरधर को जेल भेजा था।
अब उठ रहे ये सवाल
जिस शव को गिरधर का बताया वह असल में किसका था?
परिजनों ने किस आधार पर शव की शिनाख्त की?
हत्या के दर्ज मामले में पुलिस आगे क्या करेगी?
भविष्य में अगर उस मृत व्यक्ति के परिजन आते हैं जिसका अंतिम संस्कार कर दिया गया है तो ऐसे में पुलिस क्या करेगी?
