मधुबाला सी अदाएं, नरगिस सा रुतबा, बेहद हसीन थीं इमरान हाशमी की सुपरस्टार दादी, चलता था बॉलीवुड में सिक्का
40 के दशक की मशहूर अदाकारा पूर्णिमा दास वर्मा की सादगी और अदाएं दोनों लोगों को काफी पसंद थे। एक्ट्रेस इमरान हाशमी की दादी है। एक दौर में ये बॉलीवुड की सबसे सफल एक्ट्रेसेज में शुमार थीं।
भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक दौर ऐसा था जब ग्लैमर से ज्यादा सादगी और चेहरों के कुदरती हाव-भाव को सुंदरता का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता था। 1940 और 50 के दशक में अपनी कातिलाना मुस्कान और नशीली आंखों से बड़े पर्दे पर जादू चलाने वाली अभिनेत्री पूर्णिमा दास वर्मा उसी दौर का एक बेहद जगमगाता सितारा थीं। एक जमाने में जिनकी तुलना मधुबाला और नरगिस जैसी दिग्गज अभिनेत्रियों से की जाती थी, आज की पीढ़ी उन्हें बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता इमरान हाशमी की दादी और दिग्गज फिल्ममेकर महेश भट्ट की मौसी के रूप में जानती है।
मेहरबानो से ‘पूर्णिमा’ बनने का सफर और सिनेमा में पहली दस्तखत
पूर्णिमा का असली नाम मेहरबानो मोहम्मद अली था। उनका जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जहां संस्कृतियों का सुंदर मेल था। उनके पिता राम शेषाद्रि अयंगर हिंदू थे और प्रसिद्ध वितरक कीकूभाई देसाई की कंपनी में काम करते थे, जबकि उनकी मां लखनऊ के एक मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती थीं। जब मेहरबानो स्कूल में पढ़ाई कर रही थीं, तभी महज 16 साल की उम्र में उनके पड़ोसी रहमान बी देसाई ने उनके भीतर छुपे टैलेंट को पहचाना और उन्हें एक गुजराती फिल्म में ‘राधा’ का किरदार निभाने का मौका दिया।
बॉलीवुड फिल्मों में कदम रखते ही उन्हें नया पर्दे का नाम मिला पूर्णिमा। उन्होंने 1947 में आई फिल्म ‘ठेस’ से हिंदी सिनेमा में अपनी यात्रा शुरू की, लेकिन उन्हें असली पहचान और स्टारडम 1949 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पतंगा’ से मिला। इसके बाद उन्होंने ‘जोगन’ (1950), ‘सगाई’ (1951), ‘जाल’ (1952) और ‘औरत’ (1953) जैसी कई यादगार फिल्मों में उस दौर के बड़े अभिनेताओं अशोक कुमार, दिलीप कुमार और देव आनंद के साथ काम किया।निजी जिंदगी की उथल-पुथल
जितनी दिलचस्प पूर्णिमा की फिल्मी यात्रा रही, उतनी ही नाटकीय उनकी निजी जिंदगी भी रही। उन्होंने अपनी पहली शादी पत्रकार सैयद शौकत हाशमी से की। इस शादी से उनके घर एक बेटे का जन्म हुआ, जिनका नाम रखा गया अनवर हाशमी। लेकिन यह रिश्ता लंबा नहीं चल सका। 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के कठिन समय में उनके पति शौकत हाशमी पाकिस्तान चले गए और वहीं बस गए, जबकि पूर्णिमा ने भारत में ही रहने का फैसला किया। पति से अलग होने के बाद साल 1954 में उन्होंने प्रसिद्ध फिल्म निर्माता भगवान दास वर्मा से दूसरी शादी की और वह ‘पूर्णिमा दास वर्मा’ बन गईं। उनके बेटे अनवर हाशमी ने आगे चलकर एक बेटे को जन्म दिया, जिसका नाम रखा गया इमरान हाशमी। इस तरह 40 के दशक की यह चहेती अभिनेत्री इमरान हाशमी की सगी दादी बनीं।
महेश भट्ट, आलिया और भट्ट कैंप से पारिवारिक रिश्ता
सिनेमा जगत में पूर्णिमा का पारिवारिक जाल बेहद फैला हुआ है। पूर्णिमा की छोटी बहन थीं शीरीन मोहम्मद अली, जो मशहूर निर्देशक महेश भट्ट की मां थीं। यानी पूर्णिमा रिश्ते में महेश भट्ट की सगी मौसी और आलिया भट्ट की दादी थीं। इसी पारिवारिक संबंध के कारण इमरान हाशमी रिश्ते में महेश भट्ट के भांजे लगते हैं। वहीं ‘मलांग’ फेम निर्देशक मोहित सूरी भी महेश भट्ट की सबसे छोटी बहन के बेटे हैं। इस तरह बॉलीवुड का एक बड़ा वर्ग इमरान हाशमी, आलिया भट्ट, पूजा भट्ट और मोहित सूरी आपस में कजिन्स के रूप में जुड़े हुए हैं।
ढलती उम्र की तंगहाली और अमिताभ बच्चन से जुड़ा दिलचस्प किस्सा
अपने 80 से अधिक फिल्मों के लंबे करियर में पूर्णिमा ने ‘जंजीर’ (1973) में अमिताभ बच्चन की मां का एक छोटा सा किरदार भी निभाया था। सालों बाद 2019 में जब इमरान हाशमी ने अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म ‘चेहरे’ की शूटिंग शुरू की, तब पहली ही बार स्क्रीन शेयर करते समय दोनों को अहसास हुआ कि उनके बीच दशकों पुराना एक गहरा सिनेमाई रिश्ता है। हालांकि जीवन के आखिरी पड़ाव में पूर्णिमा को कठिन दौर से गुजरना पड़ा। शादी के बाद उनके पति भगवान दास वर्मा की बनाई कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुईं। भारी आर्थिक नुकसान के कारण नौबत यहाँ तक आ पहुँची कि पूर्णिमा को अपना आलीशान बंगला तक बेचना पड़ा।
चकाचौंध से दूर गुमनामी और तंगहाली के दिन बिताने के बाद साल 2013 में इस मशहूर अदाकारा ने दुनिया को अलविदा कह दिया। भले ही आज वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके अभिनय की चमक और उनकी विरासत उनके पोते इमरान हाशमी के रूप में आज भी बड़े पर्दे पर जिंदा है।
