नवरात्रि का चौथा दिन आज, मां कूष्मांडा को चढ़ाएं ये चीजें, जानें शाम का पूजा मुहूर्त
आज शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन है। चौथे दिन देवी कूष्मांडा की पूजा की जाती है। तो यहां जानिए कि आज माता रानी को क्या-क्या अर्पित करना चाहिए।
शारदीय नवरात्रि का आज चौथा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप देवी कूष्मांडा की पूजा की जाती है। माता कूष्मांडा की उपासना करने से भक्तों के सभी संकट दूर हो जाते हैं और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी कूष्मांडा ने अपनी मधुर मुस्कान से संपूर्ण संसार की रचना की, जिसे संस्कृत में ब्रह्माण्ड कहा जाता है। देवी मां को श्वेत कद्दू की बली अति प्रिय है, जिसे कुष्मांडा के नाम से जाना जाता है। ब्रह्माण्ड और कूष्मांड से संबंधित होने के कारण देवी का यह रूप देवी कूष्मांडा के नाम से लोकप्रिय हैं। तो आइए जानते हैं कि नवरात्रि के तीसरे दिन माता रानी को क्या-क्या चीजें अर्पित करनी चाहिए।
नवरात्रि के चौथे दिन माता रानी को क्या चीजें चढ़ाना चाहिए?
मां दुर्गा के चौथे स्वरूप देवी कूष्मांडा को मालपुआ अति प्रिय है। तो माता रानी को मालपुआ जरूर चढ़ाएं।
देवी कुष्मांडा को कुम्हड़ा से बनी मिठाई, पेठा या ताजे फल का भोग भी लगा सकते हैं।
नवरात्रि के चौथे दिन माता रानी को लाल रंग के फूल (गुड़हल, गुलाब) अर्पित करें।
आज देवी मां को बताशे का भोग भी अर्पित कर सकते हैं। अगर केसर वाला पेठा उपलब्ध हो तो उसे भी प्रसाद के रूप में चढ़ा सकते हैं।
नवरात्रि के तीसरे दिन इन बातों को रखें ध्यान
नवरात्रि के चौथे दिन नारंगी या नीले रंग के वस्त्र पहन कर पूजा करें।
मां कूष्मांडा का भोग बनाते समय स्वच्छता और सात्विकता का पूरा ध्यान रखें।
भोग बनाते समय तामसिक चीजों को दूर रखें।
देवी मां की पूजा में तुलसी का उपयोग न करें। माता दुर्गा की पूजा में तुलसी वर्जित माना गया है।
देवी कूष्मांडा को जो भी भोग चढ़ा रहे हैं उसे पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ अर्पित करें।
नवरात्रि के चौथे दिन शाम का पूजा मुहूर्त
आज दुर्गा माता की पूजा के लिए गोधूलि मुहूर्त का आरंभ शाम 5 बजकर 53 मिनट पर होगा। गोधूलि मुहूर्त का समापन शाम 6 बजकर 18 मिनट पर होगा। सायाह्न संध्या मुहूर्त शाम आम 5 बजकर 53 मिनट से शाम 7 बजकर 8 मिनट तक रहेगा।
नवरात्रि के चौथे दिन इन मंत्रों का करें जाप
या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
