कौशांबी पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में ताबड़तोड़ एक्शन, मुठभेड़ में घायल हुआ मुख्य आरोपी नौशाद, कई पुलिसकर्मियों पर भी गिरी गाज
कौशांबी की पटाखा फैक्ट्री में सोमवार एक भीषण ब्लास्ट में 11 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं अब इस मामले में मुख्य आरोपी नौशाद मुठभेड़ में घायल हो गया है। इसके अलावा कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
कौशांबी में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण ब्लास्ट मामले में ताबड़तोड़ एक्शन जारी है। पुलिस ने ब्लास्ट मामले में आरोपी नौशाद को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में नौशाद के पैर में गोली लगी है। घायल आरोपी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मुठभेड़ हाइवे स्थित चरवा थाना क्षेत्र के तेरह मील गांव के पास हुई है।
मुठभेड़ में घायल हुआ नौशाद
जानकारी के मुताबिक चरवा थाना क्षेत्र के तेरह मील गांव के पास तड़के पुलिस और आरोपी नौशाद के बीच मुठभेड़ हो गई। पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण ब्लास्ट के मामले में पुलिस आरोपी नौशाद की तलाश कर रही थी। पुलिस के मुताबिक, मुखबिर की सूचना पर सुबह करीब 4 बजे पुलिस टीम ने तेरह मील गांव के पास घेराबंदी की।
अस्पताल में कराया गया भर्ती
पुलिस का कहना है कि आरोपी भागने के फिराक में था, उसको रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन उसने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली नौशाद के पैर में लगी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से अवैध तमंचा और कारतूस बरामद करने का दावा किया है। घायल नौशाद को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में उसकी भूमिका और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।
पुलिसकर्मियों पर भी गिरी गाज
इस मामले में पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिरी है। मामले में लापरवाही के आरोपों के बीच पिपरी थाना प्रभारी विकास सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया है। इसके अलावा चौकी प्रभारी चायल अमित द्विवेदी और पूर्व चौकी प्रभारी मनीष पाल को भी लाइन हाजिर किया गया है। वहीं बीट आरक्षी जितेंद्र कुमार और कृष्ण कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि अवैध पटाखा फैक्ट्री और विस्फोटक सामग्री के भंडारण की जानकारी के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न किए जाने को लेकर पुलिसकर्मियों की भूमिका सवालों के घेरे में आई है।
ब्लास्ट में 11 लोगों की हुई थी मौत
बता दें कि सोमवार को पिपरी थाना इलाके के महमूदपुर मनौरी कस्बे में एक पटाखा फैक्ट्री में आग लगने के बाद भीषण धमाका हुआ। इस धमाके से पूरा इलाका दहल उठा। धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देने की बात सामने आई। देखते ही देखते कई मकान मलबे में तब्दील हो गए और आसपास के घरों में भी भारी नुकसान हुआ। हादसे में बच्चों और महिलाओं समेत अब तक 11 लोगों की मौत हो गई।
छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज
इस मामले में पिपरी पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। FIR में नौशाद, शकील, उनके बेटे आदिल, पत्नी शबाना, कहकशा और बेटी शाइना को नामजद किया गया है। पुलिस नामजद आरोपी शकील की पत्नी शबाना और शायना को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस के मुताबिक मामले में चार टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगाई गई हैं। अन्य आरोपियों की भी तलाश की जा रही है।
दस्तावेजों की जांच कर रही पुलिस
बताया जा रहा है कि नौशाद अपने बेटे आदिल के नाम से ‘आदिल डीजे’ के नाम पर पटाखा फैक्ट्री संचालित कर रहा था। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि करीब दो साल पहले जिला प्रशासन ने इस फैक्ट्री के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बावजूद फैक्ट्री के दोबारा चोरी-छिपे संचालित होने के आरोप सामने आ रहे हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने अभी तक आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि नहीं की है कि फैक्ट्री वैध थी या अवैध। यही वजह है कि अब जांच का एक अहम बिंदु फैक्ट्री के लाइसेंस और विस्फोटक सामग्री के भंडारण से जुड़े दस्तावेज भी हैं।
प्रशासन का बुलडोजर एक्शन
हादसे के बाद प्रशासन ने घनी आबादी में अवैध विस्फोटक सामग्री के भंडारण के खिलाफ भी बड़ा अभियान शुरू कर दिया गया है। मनौरी कस्बे में एक घर से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद होने के बाद प्रशासन ने उसे सुरक्षित तरीके से दो DCM वाहनों में लोड कराया। विस्फोटक सामग्री को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। इसके बाद प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर संबंधित मकान को जमींदोज कर दिया। यानी एक तरफ हादसे की जांच चल रही है, तो दूसरी तरफ प्रशासन अब घनी आबादी में छिपाकर रखे गए विस्फोटक भंडारण को लेकर भी सख्त कार्रवाई के मूड में है।
विस्फोटम सामग्री इकट्ठा करने की जांच तेज
हादसे की गंभीरता और विस्फोट की तीव्रता को देखते हुए अब जांच का दायरा और बढ़ गया है। मामले की जांच में ATS भी जुट गई है। ATS और स्थानीय पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर फैक्ट्री में इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री कैसे पहुंची। भंडारण के नियमों का पालन हुआ या नहीं और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं। कौशांबी के इस हादसे ने पटाखा कारोबार की आड़ में होने वाले कथित अवैध विस्फोटक भंडारण पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
