Dhanteras 2026 Diya Timing: धनतेरस की शाम घर में कितने दीये जलाना होता है सबसे शुभ? जानें सही संख्या और पूजा का शुभ मुहूर्त
मान्यता है कि धनतेरस की शाम विधि-विधान से दीये जलाने पर माता लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर और आरोग्य के देव भगवान धन्वंतरि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। लेकिन अब सवाल ये आता है कि इस दिन कितने दिए जलाने चाहिए? तो चलिए आपको बताते हैं इस दिन जलाए जाने वाले दीपकों की संख्या क्या होनी चाहिए।
आज धनतेरस के पावन पर्व के साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व का शुभारंभ हो गया है। इसी के साथ इस दिन से दीपदान का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। यूं तो कार्तिक मास में पूरे महीने दीपदान का विधान है किंतु धनतेरस से भाईदूज तक के इन पांच दिनों में इसका विशेष महत्व माना गया है। अब सवाल यह उठता है कि इस दिन कुल कितने दीये जलाने चाहिए? नियम के अनुसार, आप अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इस दिन कितने भी दीये जला सकते हैं, लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि दीपकों की संख्या विषम में यानी 11, 21 या 51…इस तरह से होनी चाहिए। हालांकि, प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन 13 दीपक जलाना सर्वाधिक शुभ माना गया है। आइए जानते हैं कि इस दिन ये 13 दीपक कहां-कहां जलाकर रखने चाहिए।
धनतेरस पर दीये जलाने का शुभ मुहूर्त 2026
धनतेरस पर दीये जलाने का शुभ मुहूर्त शाम 06:02 से शाम 07:57 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त में विधि विधान पूजा करें और इसके बाद घर के कोने-कोने में दीपक जलाकर रखें।
धनतेरस पर कितने दीये जलाएं और कहां-कहां रखें?
पहला दीपक घर के मंदिर में
दूसरा दीपक घर के बाहर दक्षिण दिशा की तरफ यमराज के लिए
तीसरा दीपक घर के मुख्य द्वार
चौथा दीपक तुलसी जी के पास
पांचवां दीपक घर की छत पर
छठा दीपक पीपल के पेड़ के नीचे
सातवां दीपक किसी मंदिर में
आठवां दीपक कूड़े के पास
नौवा दीपक वॉशरूम के बाहर
दसवां दीपक खिड़कियों के पास
ग्यारहवां दीपक रसोई घर में
बारहवां दीपक बेल वृक्ष के नीचे
तेरहवां दीपक घर के बीचों बीच
दीपक जलाने का मंत्र
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
धनतेरस पर यमराज का दीपक कैसे जलाएं?
धनतेरस पर यमराज का दीपक जलाने के लिए आटे या मिट्टी के चौमुखे दीपक में सरसों या तिल का तेल भरें और फिर उसमें चार बातियां लगाएं। इस दीपक को शाम की पूजा के बाद घर के बाहर जला दें। साथ ही दीपक जलाते समय यह मंत्र बोलें – मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम।।
