01 October, 2026 (Thursday)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी पुलिस SI भर्ती 2025 के नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगाई, क्या है कारण?

यूपी पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती 2025 से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती 2025 के नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती से जुड़ी हुई बड़ी खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती 2025 के नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है। जानकारी के अनुसार, हाई कोर्ट ने याची श्याम सुंदर, कमलेश यादव व अन्य और यश पांडेय व 44 अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है। हाई कोर्ट ने कहा है कि SI भर्ती को लेकर दाखिल याचिकाओं पर 5 अक्टूबर को मामले की अगली सुनवाई होगी। यह फैसला जस्टिस अनीस कुमार गुप्ता की सिंगल बेंच ने सुनाया है।
कब हुई थी परीक्षा?
दरअसल, उत्तर प्रदेश उप निरीक्षक नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती 2025 का विज्ञापन 12 अगस्त 2025 को जारी किया गया था। इसके लिए 15 लाख 75 हजार 7 सौ 6 आवेदन प्राप्त हुए थे। लिखित परीक्षा बीते 14 व 15 मार्च को दो-दो पालियों में हुई थी। जिसमें 10 लाख 77 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। लिखित परीक्षा का परिणाम बीते 7 मई को जारी किया गया था। इस परीक्षा में 12733 छात्रों को अगले चरण की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए उत्तीर्ण किया गया। इसके बाद अंतिम परिणाम 14 जुलाई को जारी किया गया था। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा नियुक्ति पत्र वितरण की तैयारी चल रही थी। बता दें कि हाल ही में सीएम योगी ने पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की सीधी भर्ती-2023 के तहत चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किया था।
नियुक्ति पत्र जारी करने पर क्यों लगी रोक?
अधिवक्ता संजय कुमार यादव के मुताबिक, भर्ती बोर्ड द्वारा प्रोविजनल आंसर की 23 मार्च को जारी की गई थी। जबकि फाइनल आंसर की लिखित परीक्षा परिणाम के दिन यानी 7 मई को जारी हुई, तो कई प्रश्नों के उत्तर में बदलाव कर दिया गया। इस पर अभ्यर्थियों ने आपत्ति की क्योंकि एक प्रश्न 2.5 अंक का था तो कुछ अभ्यर्थी कुछ अंक से असफल हो गए। कुछ अभ्यर्थी ऐसे भी हैं जिनका चयन अगली प्रक्रिया में तो हुआ। लेकिन 14 जुलाई को जब अंतिम परिणाम जारी किया गया तो कई अभ्यर्थी कुछ एक नंबर या दो नंबर से असफल हो गए। अभ्यर्थियों ने बदलाव किए गए प्रश्नों को लेकर आपत्ति भी दर्ज कराई थी। लेकिन भर्ती बोर्ड ने कंसीडर नहीं किया। इस पर अभ्यर्थियों ने याचिकाएं दाखिल की। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे अधिवक्ता संजय कुमार यादव व आलोक मिश्र ने पक्ष रखा।

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