आज है सावन सोम प्रदोष व्रत, यहां पढ़ें इसकी पावन व्रत कथा
आज यानी 10 अगस्त 2026 को सावन सोमवार और प्रदोष व्रत का शुभ संयोग बना है। इस शुभ दिन पर भक्त भोलेनाथ की विशेष पूजा जरूर करें। साथ ही प्रदोष व्रत रखने वाले जातक इस पावन कथा को जरूर पढ़ें।
आज सावन के दूसरे सोमवार पर प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग बना है। जिससे यह दिन अत्यंत ही शुभ साबित होने वाला है। इस दिन शिव की भक्ति करने से आपके जीवन में सुख-शांति आएगी और सारे दुखों का अंत हो जाएगा। पंचांग अनुसार आज यानी 10 अगस्त 2026 को प्रदोष काल पूजा मुहूर्त 07:05 PM से 09:14 PM तक रहेगा। शास्त्रों अनुसार, इस मुहूर्त में भगवान शिव की पूजा बेहद फलदायी साबित होती है। इस मुहूर्त में भगवान शिव की विधि विधान पूजा करने के साथ सोम प्रदोष व्रत की कथा भी जरूर सुनें। तभी आपका व्रत पूर्ण माना जाएगा। चलिए जानते हैं सोम प्रदोष व्रत की पावन कथा।
सोम प्रदोष व्रत कथा (Som Pradosh Vrat Katha)
कथा अनुसार, एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी, जिसके पति का स्वर्गवास हो गया था। अब उसके पास सिर्फ उसका पुत्र ही था। वह प्रातः होते ही अपने पुत्र के साथ भीख मांगने निकल पड़ती थी। एक दिन जब ब्राह्मणी घर लौट रही थी तो उसे एक लड़का घायल अवस्था में मिला। ब्राह्मणी उसे अपने घर ले आई। ब्राह्मणी नहीं जानती थी कि वह जिसे घर लाई है वह विदर्भ का राजकुमार है। शत्रु सैनिकों ने उसके राज्य पर आक्रमण कर उसके पिता को बन्दी बना लिया था और उसका राज्य छीन लिया छा, इसलिए वह मारा-मारा फिर रहा था।
राजकुमार ब्राह्मणी के घर रहने लगा। एक दिन अंशुमति नामक एक गंधर्व कन्या ने राजकुमार को देखा और वह उस पर मोहित हो गई। अगले दिन अंशुमति अपने माता-पिता के साथ राजकुमार से मिलाने आई। लड़की के माता-पिता को भी राजकुमार भा गया। कुछ दिनों बाद अंशुमति के माता-पिता को भगवान शिव सपने में दिखाई दिए और उन्होंने उन्हें आदेशा दिया कि राजकुमार और अंशुमति का विवाह कर दिया जाए। दोनों ने वैसा ही किया। ब्राह्मणी नियम से प्रदोष व्रत किया करती थी। उसके व्रत के प्रभाव और गंधर्वराज की सेना की मदद से राजकुमार ने विदर्भ से शत्रुओं को खदेड़ दिया और अपना राज्य वापस पाया। राजकुमार ने ब्राह्मण-पुत्र को अपना प्रधानमंत्री बनाया। इस तरह ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के माहात्म्य से राजकुमार और ब्राह्मण-पुत्र का जीवन सुख से भर गया।
ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत रखने से जैसे राजकुमार और ब्राह्मण-पुत्र के दिन फिरे, वैसे ही भगवान शिव अपने सभी भक्तों के दिन फेरते हैं। बोलो हर हर महादेव !
