27 July, 2026 (Monday)

CJP प्रोटेस्ट में सीमा पार से दुष्प्रचार की साजिश! महाराष्ट्र साइबर सेल ने 500 से ज्यादा सोशल मीडिया प्रोफाइल को किया चिन्हित

साइबर सेल की टीम ने बताया कि 100 अकाउंट भारत के बाहर से चलाए जा रहे थे। खासकर पाकिस्तान और कुछ मध्य-पूर्वी देशों से कुछ लोग शामिल थे, जो इस सीजेपी के आंदोलन के भ्रामक फोटो और वीडियो पोस्ट कर रहे थे।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए, महाराष्ट्र साइबर ने तकनीक-आधारित निगरानी और कार्रवाई का एक खास अभियान शुरू किया। इसमें बड़े पैमाने पर ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT), मेटाडेटा की जांच, व्यवहार का विश्लेषण और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर फैल रहे AI-जनरेटेड और डीपफेक कंटेंट की फोरेंसिक जांच शामिल थी।
गलत, भ्रामक और AI-जनरेटेड कंटेंट
इस निगरानी प्रक्रिया के दौरान, महाराष्ट्र साइबर ने सोशल मीडिया अकाउंट्स के एक ऐसे सुनियोजित नेटवर्क की पहचान की जो गलत, भ्रामक और AI-जनरेटेड कंटेंट फैला रहे थे। इनका मकसद लोगों की राय को प्रभावित करना, भ्रम पैदा करना, अशांति भड़काना और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना था। तकनीकी विश्लेषण से यह भी पता चला कि इसमें भारत के बाहर से (खासकर पाकिस्तान और कुछ मध्य-पूर्वी देशों से) काम करने वाले असामाजिक तत्व शामिल थे, जो भारतीय दर्शकों को निशाना बनाकर भ्रामक नैरेटिव को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहे थे।

आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट और हैंडल की हुई पहचान
तेजी से कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र साइबर ने पहचाने गए अकाउंट्स के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू की, जिसमें संबंधित सोशल मीडिया मध्यस्थों के माध्यम से आपत्तिजनक कंटेंट को हटवाना भी शामिल था। निगरानी अभियान के परिणामस्वरूप इंस्टाग्राम, X, Facebook और YouTube जैसे कई प्लेटफॉर्म पर 429 आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट और हैंडल की पहचान की गई।

100 अकाउंट भारत के बाहर से चल रहे थे
तकनीकी जांच से पता चला कि लगभग 100 अकाउंट भारत के बाहर से संचालित हो रहे थे। आगे के विश्लेषण से यह स्थापित हुआ कि 140 से अधिक पोस्ट और प्रोफाइल में AI-जनरेटेड या AI-सहायता प्राप्त कंटेंट शामिल था, जिसकी पहचान और पुष्टि महाराष्ट्र साइबर के अत्याधुनिक ऑडियो-वीडियो फोरेंसिक विश्लेषण टूल का उपयोग करके वैज्ञानिक रूप से की गई।

बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए दृश्य
पहचाने गए AI-जनरेटेड कंटेंट की विस्तृत तकनीकी जांच से पता चला कि इसमें भीड़ के डिजिटल रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए दृश्य, सिंथेटिक आवाज बनाना, क्लोन किया गया ऑडियो और सार्वजनिक हस्तियों से गलत तरीके से जोड़े गए हेरफेर किए गए वीडियो शामिल थे। प्रतिनिधि सोशल मीडिया अकाउंट और उनसे संबंधित AI-जनरेटेड कंटेंट नीचे दिए गए हैं।

साइबर सेल ने सभी नागरिकों से की खास अपील
महाराष्ट्र साइबर सभी नागरिकों से अपील है कि वे संवेदनशील सार्वजनिक घटनाओं से जुड़ी जानकारी को देखते और साझा करते समय सावधानी बरतें। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे ‘रुकें, जांचें और जिम्मेदारी से साझा करें’।

साथ ही सोशल मीडिया पर कोई भी मैसेज, इमेज या वीडियो फॉरवर्ड करने से पहले, यूजर्स को सरकारी स्रोतों और भरोसेमंद समाचार संगठनों के जरिए उसकी सच्चाई की जांच करनी चाहिए। गलत जानकारी को फैलने से रोकने और सार्वजनिक शांति व सद्भाव बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना जरूरी है।

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