25 October, 2026 (Sunday)

चंपत राय की जगह कौन? ट्रस्ट के महासचिव पद की रेस में ये 3 बड़े नाम आए सामने

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला सामने आने के बाद आज श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक होने वाली है। इस बीच, ट्रस्ट के महासचिव पद के लिए इन तीन नामों पर चर्चा तेज हो गई है।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आज बड़े फैसले का दिन है। चढ़ावा चोरी का खुलासा होने के बाद आज दोपहर 3 बजे श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक होने जा रही है। इस बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर फैसला होगा। इसके साथ ही, इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की जगह कौन लेगा इस पर भी विचार होगा।

ट्रस्ट के महासचिव पद के लिए तीन नामों पर चर्चा हो रही है, जिसमें VHP के महामंत्री बजरंग बागड़, बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक नीरज दौनेरिया और रिटायर्ड IFS अधिकारी कृष्णमोहन का नाम शामिल है।

इन नामों पर चर्चा तेज
बजरंग बागड़- VHP के महामंत्री, पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट, नालको चेयरमैन रह चुके हैं।
नीरज दौनेरिया- बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक, राम मंदिर आंदोलन से लंबे समय से जुड़े रहे।
कृष्णमोहन- रिटायर्ड IFS अधिकारी, पूर्वी यूपी के RSS के संघ संचालक।
मंदिर परिसर के गेस्ट हाउस में बैठक
श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक आज दोपहर 3 बजे राम मंदिर परिसर के गेस्ट हाउस में होगी। ये बैठक पहले मणि राम दास छावनी में होनी थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से मीडिया की भारी संख्या में मौजूदगी को देखते हुए इसकी जगह बदली गई है।

अनिल मिश्रा भी बैठक में रहेंगे मौजूद
बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास करेंगे। ट्रस्ट के ज्यादातर सदस्य इस बैठक में मौजूद रहेंगे, जबकि के. परासरण बैठक में ऑनलाइन रूप से शामिल होंगे। चंपत राय और अनिल मिश्रा बैठक में मौजूद रहेंगे।

चंपत राय ने 26 जून को दिया था इस्तीफा
बता दें कि चढ़ावा चोरी का मामला तूल पकड़ने के बाद चंपत राय ने 26 जून को महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद अयोध्या पुलिस ने उनसे और अनिल मिश्रा से लंबी पूछताछ की है।

CEO की नियुक्ति पर भी फैसला
आज बैठक में SIT की अंतरिम रिपोर्ट भी सामने रखी जाएगी। साथ ही, राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था के लिए CEO की नियुक्ति पर भी फैसला होगा। अगर राम मंदिर ट्रस्ट में CEO की नियुक्ति होती है, तो राम मंदिर से जुड़े सभी प्रशासनिक अधिकार सीईओ के पास चले जाएंगे।

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