02 July, 2026 (Thursday)

राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में निकला वाराणसी कनेक्शन, आउटसोर्सिंग और भर्ती प्रक्रिया जांच के घेरे में

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में वाराणसी कनेक्शन सामने आया है। जांच में पता चला कि कई आरोपी एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी के कर्मचारी थे, जिन्हें SBI के जरिए कैश काउंटिंग के लिए लगाया गया था। भर्ती प्रक्रिया, आउटसोर्सिंग और बैंकिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल उठे हैं। पूरी व्यवस्था जांच के घेरे में है।
अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और बड़े खुलासे सामने आ रहे हैं। अब इस पूरे मामले में वाराणसी कनेक्शन सामने आया है, जिसमें आउटसोर्सिंग एजेंसी, बैंकिंग सिस्टम और कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया तक सवालों के घेरे में आ गई है। जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में से 6 आरोपी वाराणसी की एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी, सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, के पेरोल पर थे।

सभी कर्मचारी अनिल और टिन्नू के करीबी: सूत्र
सूत्रों के मुताबिक, यह एजेंसी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अयोध्या स्थित नया घाट ब्रांच के कहने पर कर्मचारियों की आपूर्ति करती थी। बताया जा रहा है कि SBI ने कैश काउंटिंग के काम के लिए 19 कर्मचारियों की मांग की थी, जिसके बाद वाराणसी की इस एजेंसी ने लोगों को हायर करके बैंक को उपलब्ध कराया। इन्हीं कर्मचारियों को बाद में राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती और कैश हैंडलिंग के काम में लगाया गया। सूत्रों के मुताबिक, ये सभी कर्मचारी कथित रूप से अनिल मिश्रा और टिन्नू यादव के करीबी बताए जा रहे हैं।

कैश गिनने लिए हायर किए गए थे कर्मचारी
एजेंसी ने जिन 19 लोगों को हायर किया था, उन्हें SBI की टीम को सौंपा गया था। इन्हीं कर्मचारियों को मंदिर में चढ़ावे की गिनती और नकदी से जुड़े काम में लगाया गया। बताया गया है कि हर कर्मचारी को करीब 20 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि यह लोग मूल रूप से हाउसकीपिंग के काम के लिए रखे गए थे, लेकिन बाद में इन्हें सीधे चढ़ावा गिनने जैसे संवेदनशील काम में लगा दिया गया।

कर्मचारियों के चयन पर क्यों उठ रहे सवाल?
सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर में रोजाना मिलने वाले चढ़ावे और दान की रकम अयोध्या के तुलसी नगर स्थित SBI शाखा में जमा कराई जाती थी। इस नकदी की गिनती, छंटाई और सुरक्षित परिवहन के लिए बैंक ने वाराणसी की इसी आउटसोर्सिंग एजेंसी के साथ करार किया था। अब जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत काम करने वाले कर्मचारियों का चयन और उनकी भूमिका पारदर्शी तरीके से तय नहीं की गई थी। सूत्रों के मुताबिक, कुछ कर्मचारियों की नियुक्ति सिफारिश के आधार पर भी की गई थी।

एजेंसी ने खुद को किया मामले से अलग
सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के मालिक गौरव सिंह ने इस पूरे मामले से खुद को अलग बताया है। उनका कहना है कि उनकी कंपनी का सीधा संबंध राम मंदिर ट्रस्ट से नहीं है, बल्कि उनका करार केवल SBI के साथ है। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों की भर्ती केवल हाउसकीपिंग के लिए की गई थी और मंदिर में उनसे क्या काम कराया गया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।

ऑडिट रिपोर्ट से शुरू हुआ चोरी का शक
जांच में यह भी पता चला है कि ट्रस्ट को जनवरी में ही चढ़ावे में गड़बड़ी का शक हो गया था। हर महीने होने वाले ऑडिट में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) ने बताया था कि चढ़ावे की राशि में अचानक गिरावट आ रही है और वाउचर व रसीदों में मेल नहीं है। CA की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 5 लाख रुपये से अधिक के खर्चों का सही हिसाब नहीं मिल रहा है। इसके बाद ट्रस्ट की ओर से महासचिव चंपत राय को पत्र और व्हाट्सऐप संदेश भेजे गए, जिनमें सुझाव दिया गया कि:

पूरे खातों की विस्तृत जांच कराई जाए
चढ़ावे के लिए अलग विभाग प्रमुख नियुक्त किया जाए
विदेशी मुद्रा (फॉरेन करेंसी) के लिए अलग व्यवस्था हो
स्टाफ के ड्रेस कोड और फ्रिस्किंग SOP का सख्ती से पालन हो
टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए
चंपत राय की नारजगी से नहीं हो सका सुधार
बताया जा रहा है कि इस पत्र के बाद चंपत राय नाराज हो गए और किसी नई व्यवस्था या नियुक्ति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। इसके चलते जनवरी से मई तक कोई बड़ा सुधार नहीं हो सका। मई में चढ़ावे की राशि में और गिरावट दर्ज होने के बाद कलेक्शन सेंटर में गुप्त रूप से एक स्पाई कैम लगाया गया। इसकी जानकारी केवल कुछ चुनिंदा लोगों को ही थी। 24 घंटे की रिकॉर्डिंग में सामने आया कि गिनती के दौरान कुछ कर्मचारी नोट जेब में रखते दिखाई दिए। इसी रिकॉर्डिंग के बाद 6 और 7 जून के बीच इस मामले का खुलासा हुआ।

जांच के दायरे में आ गई है पूरी व्यवस्था
अब यह मामला केवल चोरी तक सीमित नहीं रह गया है। जांच एजेंसियां अब पूरी व्यवस्था की पड़ताल कर रही हैं, जिसमें शामिल हैं:

कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया
वेरिफिकेशन सिस्टम
आउटसोर्सिंग व्यवस्था
कैश हैंडलिंग की जिम्मेदारी
बैंक और एजेंसी के बीच करार की शर्तें
करार की शर्तों पर एजेंसी ने साधी चुप्पी
मामले की जांच का हवाला देते हुए सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज ने फिलहाल चुप्पी साध ली है। एजेंसी ने न तो करार की शर्तों पर कोई स्पष्ट जवाब दिया है और न ही यह बताया है कि कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए क्या मानक अपनाए गए थे। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं।

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